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Ramayan Ke 51
 Prerak Prasang
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Vilom Shabdkosh

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Sant Sameer
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
Sant Sameer
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹400.Current price is: ₹300.

In stock

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7-10 Days

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ISBN:
Categories: ,
Page Extent:
16

समान्य धारणा है कि ‘विलोम शब्दकोश’ केवल उन विद्यार्थियों के काम के होते हैं, जिन्हें भाँति-भाँति की परीक्षाएँ देनी होती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि हिंदी के लिए या हिंदी में काम करनेवाले प्रायः सभी तरह के लोगों को कभी-न-कभी विलोम शब्दों को जानने-समझने की आवश्यकता होती ही है। इस अर्थ में यह कोश विद्यार्थियों, अध्यापकों, लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों आदि सबका हितसाधक बनेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। इस कोश की एक विशिष्टता यह है कि इसमें संगृहीत सभी शब्द वणोर्ं के सुचिंतित क्रम का ध्यान रखते हुए सँजोए गए हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों में हिंदी-वर्णमाला की सामान्य समझ विकसित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ण की मूल विशेषता को भी संक्षिप्त में बताया गया है। ऐसा भी नहीं है कि यह पुस्तक सिर्फ ‘विलोम शब्दकोश’ भर ही है, बल्कि परिशिष्ट के रूप में इसकी उपयोगिता को विस्तार देने का प्रयत्न किया गया है। विलोम शब्दों पर आधारित पदबंध इसकी रोचकता और उपयोगिता को और बढ़ाते हैं। भाषा को सुदृढ और समृद्ध करने के लिए एक आवश्यक पुस्तक।.

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Description

समान्य धारणा है कि ‘विलोम शब्दकोश’ केवल उन विद्यार्थियों के काम के होते हैं, जिन्हें भाँति-भाँति की परीक्षाएँ देनी होती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि हिंदी के लिए या हिंदी में काम करनेवाले प्रायः सभी तरह के लोगों को कभी-न-कभी विलोम शब्दों को जानने-समझने की आवश्यकता होती ही है। इस अर्थ में यह कोश विद्यार्थियों, अध्यापकों, लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों आदि सबका हितसाधक बनेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। इस कोश की एक विशिष्टता यह है कि इसमें संगृहीत सभी शब्द वणोर्ं के सुचिंतित क्रम का ध्यान रखते हुए सँजोए गए हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों में हिंदी-वर्णमाला की सामान्य समझ विकसित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ण की मूल विशेषता को भी संक्षिप्त में बताया गया है। ऐसा भी नहीं है कि यह पुस्तक सिर्फ ‘विलोम शब्दकोश’ भर ही है, बल्कि परिशिष्ट के रूप में इसकी उपयोगिता को विस्तार देने का प्रयत्न किया गया है। विलोम शब्दों पर आधारित पदबंध इसकी रोचकता और उपयोगिता को और बढ़ाते हैं। भाषा को सुदृढ और समृद्ध करने के लिए एक आवश्यक पुस्तक।.

About Author

जन्म: 10 जुलाई, 1970, अंबेडकर नगर (उ.प्र.)। प्रतिष्ठित पत्रकार और समाजकर्मी। उन कुछ महत्त्वपूर्ण लोगों में एक, जिन्होंने स्वतंत्र भारत में पहली बार बहुराष्ट्रीय उपनिवेश के खिलाफ आवाज उठाते हुए अस्सी के दशक के उत्तरार्ध में स्वदेशी-स्वावलंबन का आंदोलन पुनः शुरू किया। उनके लिखे की अनुगूँज संसद् और विधानसभाओं तक भी पहुँची। वैकल्पिक चिकित्सा, समाज-व्यवस्था, भाषा, संस्कृति, अध्यात्म आदि विषयों में रुचि। असाध्य समझी जानेवाली कुछ बीमारियों के शिकार हुए तो वैकल्पिक चिकित्सा के अध्येता बने और अपनी चिकित्सा खुद की। नब्बे के दशक की प्रतिष्ठित फीचर सर्विस ‘स्वदेशी संवाद सेवा’ के आप संस्थापक संपादक रहे। बहुराष्ट्रीय उपनिवेशवाद पर बहस की शुरुआत करनेवाली वैचारिक पत्रिका ‘नई आजादी उद्घोष’ के भी संपादक और सलाहकार संपादक रहे। व्यावसायिक पत्रकारिता के तौर पर विभिन्न अखबारों व न्यूज एजेंसियों के लिए खबरनवीसी करते हुए फिलहाल हिंदुस्तान टाइम्स समूह से जुड़े हुए हैं। कृतियाँ: ‘सफल लेखन के सूत्र’; ‘हिंदी की वर्तनी’ (पुरस्कृत); ‘अच्छी हिंदी कैसे लिखें’; ‘स्वदेशी चिकित्सा’; ‘सौंदर्य निखार’; ‘विलोम शब्दकोश’; ‘स्वतंत्र भारत की हिंदी पत्रकारिता: इलाहाबाद जिला’; ‘साप्ताहिक हिंदुस्तान: एक अध्ययन’; ‘दैनिक हिंदुस्तान: एक अध्ययन’ (शोध-प्रबंध), ‘पत्रकारिता के युग निर्माता: प्रभाष जोशी’। इ-मेल: santsameer@gmail.com.

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