Ramkumar Bhramar (Set Of 4 Books): Antar Dhara | Mukti-Sangharsh | Uttar Dakshin | Jay-Yatra
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1.अंतर धारा :- श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित वृहदाकार उपन्यास कुल 10 खंडों में लिखा गया है, लेकिन यहाँ इस खंड में श्रीकृष्ण कथा के दो उपन्यास कालिंदी के किनारे और कर्मयज्ञ एक साथ दिए गए हैं। प्रथम भाग में जहाँ श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन है, वहीं पुस्तक के उत्तरार्ध में श्रीकृष्ण के संघर्ष की दास्तान को सरल शब्दों में उकेरा गया है।.
2. मुक्ति संघर्ष :- श्रीकृष्ण कथा पर आधारित पांच खंडो में यह एक ऐसी उपन्यास है, जो पाठकों का भरपूर मनोरंजन तो करती ही है साथ ही साथ अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता से भी उन्हें अवगत कराती है। इस खंड में गर्गऋषि और गोपाली अप्सरा से जन्मे तथा कालनेमि द्वारा संरक्षित महाबलशाली कालयवन की कथा उस ओर संकेत करती है, जहां वह आर्य रक्त होते हुए भी आर्यो के विरूद्ध उठ खड़ा होता है। इसमें जरासंध के क्रूर आक्रमण का भी वर्णन है।.
3.उत्तर दक्षिण :- श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित वृहदाकार उपन्यास कुल 10 खंडों में लिखा गया है लेकिन यहां इस खंड में श्रीकृष्ण कथा के दो उपन्यास जनपथ पर एवं जलयात्रा एक साथ दिए गए हैं। उपन्यास के पूर्वार्ध में मथुरावासियों का रेगिस्तान से होते हुए द्वारका जाने का कष्टपूर्ण वर्णन है और उत्तरार्ध में श्रीकृष्ण समूचे भारत के लिए मुक्तिदाता बनकर उभरते हैं और उनके नीतिज्ञ होने की बात उजागर होती है।.
4.जय यात्रा :- श्रीकृष्ण कथा पर आधारित पांच खंडो में यह एक ऐसा उपन्यास है, जो पाठकों का भरपूर मनोरंजन तो करता ही है साथ ही साथ अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता से भी उन्हें अवगत कराता है। इस खंड में श्रीकृष्ण के कर्मयुद्ध का वर्णन सहेजा गया है। वे जन-जन की आस्था के पुरुष हैं।.
1.अंतर धारा :- श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित वृहदाकार उपन्यास कुल 10 खंडों में लिखा गया है, लेकिन यहाँ इस खंड में श्रीकृष्ण कथा के दो उपन्यास कालिंदी के किनारे और कर्मयज्ञ एक साथ दिए गए हैं। प्रथम भाग में जहाँ श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन है, वहीं पुस्तक के उत्तरार्ध में श्रीकृष्ण के संघर्ष की दास्तान को सरल शब्दों में उकेरा गया है।.
2. मुक्ति संघर्ष :- श्रीकृष्ण कथा पर आधारित पांच खंडो में यह एक ऐसी उपन्यास है, जो पाठकों का भरपूर मनोरंजन तो करती ही है साथ ही साथ अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता से भी उन्हें अवगत कराती है। इस खंड में गर्गऋषि और गोपाली अप्सरा से जन्मे तथा कालनेमि द्वारा संरक्षित महाबलशाली कालयवन की कथा उस ओर संकेत करती है, जहां वह आर्य रक्त होते हुए भी आर्यो के विरूद्ध उठ खड़ा होता है। इसमें जरासंध के क्रूर आक्रमण का भी वर्णन है।.
3.उत्तर दक्षिण :- श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित वृहदाकार उपन्यास कुल 10 खंडों में लिखा गया है लेकिन यहां इस खंड में श्रीकृष्ण कथा के दो उपन्यास जनपथ पर एवं जलयात्रा एक साथ दिए गए हैं। उपन्यास के पूर्वार्ध में मथुरावासियों का रेगिस्तान से होते हुए द्वारका जाने का कष्टपूर्ण वर्णन है और उत्तरार्ध में श्रीकृष्ण समूचे भारत के लिए मुक्तिदाता बनकर उभरते हैं और उनके नीतिज्ञ होने की बात उजागर होती है।.
4.जय यात्रा :- श्रीकृष्ण कथा पर आधारित पांच खंडो में यह एक ऐसा उपन्यास है, जो पाठकों का भरपूर मनोरंजन तो करता ही है साथ ही साथ अपनी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता से भी उन्हें अवगत कराता है। इस खंड में श्रीकृष्ण के कर्मयुद्ध का वर्णन सहेजा गया है। वे जन-जन की आस्था के पुरुष हैं।.
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