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दण्डपाणि च भैरवम: काशी की सम्पदा का महत्त्वपूर्ण अभिलेख I Dandapani Cha Bhairavam
Publisher:
Manjul Publishing House
| Author:
Prof (Dr) Vijay Nath Mishra I Yatindra Nath Chaturvedi
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Manjul Publishing House
Author:
Prof (Dr) Vijay Nath Mishra I Yatindra Nath Chaturvedi
Language:
Hindi
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ISBN:
Categories: Hindi, New Releases
Page Extent:
202
सृष्टि के आदि काल से मौन जहाँ तपस्यारत है । शब्द के रूप में नाद जहाँ जन्म लेकर पनपते हैं स्वयं अपने भगवान् शिव के लिए । यहीं पर स्वयंभू शिव हर युग में देह और प्राण को सायुज्य प्रदान करते हैं । इस काशी ने एक कालातीत सफर तय किया है, उस युग के कल से लेकर इस युग के आज तक का सफर । दण्डपाणि च भैरवम् हमारे भगवान् और भारतीय सभ्यता की परत दर परत संक्षिप्त कथा है । आनन्दकानन के इस इतिहासगाथा का विवरण जगह- जगह टूटे और बिखरे हुए अक्षरों में मिलता है, जिसे यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी और डॉ. विजय नाथ मिश्र ने चुन-चुन कर एकत्रित किया है।
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Description
सृष्टि के आदि काल से मौन जहाँ तपस्यारत है । शब्द के रूप में नाद जहाँ जन्म लेकर पनपते हैं स्वयं अपने भगवान् शिव के लिए । यहीं पर स्वयंभू शिव हर युग में देह और प्राण को सायुज्य प्रदान करते हैं । इस काशी ने एक कालातीत सफर तय किया है, उस युग के कल से लेकर इस युग के आज तक का सफर । दण्डपाणि च भैरवम् हमारे भगवान् और भारतीय सभ्यता की परत दर परत संक्षिप्त कथा है । आनन्दकानन के इस इतिहासगाथा का विवरण जगह- जगह टूटे और बिखरे हुए अक्षरों में मिलता है, जिसे यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी और डॉ. विजय नाथ मिश्र ने चुन-चुन कर एकत्रित किया है।
About Author
देश के जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट प्रोफेसर डॉ. विजय नाथ मिश्र बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और पूर्व विभागाध्यक्ष, सर सुंदरलाल चिकित्सालय, बीएचयू के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक हैं। आपने दिल्ली के मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान, और पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं आयुर्विज्ञान संस्थान (NEIGRIHMS) शिलांग के न्यूरोलॉजी विभाग में भी काम किया है। प्रो. मिश्र गोस्वामी तुलसीदास जी की तपस्थली काशी के तुलसी घाट स्थित परम्परा और विरासत के साथ ही, उनके द्वारा स्थापित संकटमोचन मंदिर के शिवसायुज्य प्राप्त महन्त, महान् वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् प्रोफेसर वीरभद्र मिश्र के पुत्र हैं। न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से सक्रिय प्रोफेसर मिश्र को मिर्गी मरीजों के प्रति समर्पित होने के कारण उत्तर भारत की हिन्दी पट्टी में ‘मिर्गी मैन’ के रूप में जाना जाता है। ग्रामीण इलाकों में अपने सामाजिक सरोकारों के साथ ही प्रोफेसर मिश्र की काशिका सम्पदा में गहरी रुचि है। प्रोफेसर मिश्र की एक महत्त्वपूर्ण रचना रामचरित मानस की पांडुलिपियाँ (ज्ञात-अज्ञात तथ्य) पूरे देश में चर्चा का विषय रही है, जिसे हिन्दुस्तानी एकेडमी, इलाहाबाद द्वारा तुलसीदास पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आपको 2013 में स्वास्थ्य उत्कृष्टता पुरस्कार और विज्ञान गौरव, स्पुत एशिया फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा चिकित्सा उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
श्री यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी एक साहित्यकार हैं, जो प्राचीन और आधुनिक साहित्य तथा इतिहास पर आधारित अपने कार्यों के लिए जाने जाते हैं। श्री चतुर्वेदी ने अपनी रचनात्मक यात्रा ‘वैदिक मंत्रों में समाजीकरण की स्वयंसिद्धियाँ’ के लेखन के साथ आरम्भ कर भारत की अध्ययन प्रदक्षिणा की। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं : महाभारत से प्रेरित ‘महाभारत विश्वकोश’ और ‘हस्तिनापुर की कहानियाँ’; रामायण से प्रेरित ‘रामायण विश्वकोश’और ‘रामायण की बस्ती’; साहित्य से प्रेरित ‘राजभाषा साहित्यकार कोश’ और ‘हिन्दी और हिन्दीकार’ तथा परम्पराओं से प्रेरित ‘काशी तीर्थ यात्रा’ और ‘काशी के प्रमुख व्रत, तीर्थ स्नान एवं त्यौहार’। श्री चतुर्वेदी की लिखी दो पुस्तकें सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने कई विश्वविद्यालयों की अध्ययन सामग्री का लेखन किया है। श्री चतुर्वेदी विभिन्न उच्चस्तरीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। भारत सरकार के केन्द्रीय नागर विमानन मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति के राजपत्रित सदस्य होने के साथ ही श्री चतुर्वेदी भारत सरकार के केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, केन्द्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय, केन्द्रीय वित्त मंत्रालय (राजस्व) की हिन्दी सलाहकार समिति के राजपत्रित सदस्य रहे हैं। श्री यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी को संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वरिष्ठ अध्येतावृत्ति (Senior Fellowship) अवॉर्ड-2019 और तिरुपति तिरुमलई देवस्थानम्, आंध्र प्रदेश से वैदिक अनुसंधान प्रकाशन अनुदान सम्मान 1995-96 सहित कई सम्मान प्राप्त हैं।
श्री यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी एक साहित्यकार हैं, जो प्राचीन और आधुनिक साहित्य तथा इतिहास पर आधारित अपने कार्यों के लिए जाने जाते हैं। श्री चतुर्वेदी ने अपनी रचनात्मक यात्रा ‘वैदिक मंत्रों में समाजीकरण की स्वयंसिद्धियाँ’ के लेखन के साथ आरम्भ कर भारत की अध्ययन प्रदक्षिणा की। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं : महाभारत से प्रेरित ‘महाभारत विश्वकोश’ और ‘हस्तिनापुर की कहानियाँ’; रामायण से प्रेरित ‘रामायण विश्वकोश’और ‘रामायण की बस्ती’; साहित्य से प्रेरित ‘राजभाषा साहित्यकार कोश’ और ‘हिन्दी और हिन्दीकार’ तथा परम्पराओं से प्रेरित ‘काशी तीर्थ यात्रा’ और ‘काशी के प्रमुख व्रत, तीर्थ स्नान एवं त्यौहार’। श्री चतुर्वेदी की लिखी दो पुस्तकें सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। साथ ही, उन्होंने कई विश्वविद्यालयों की अध्ययन सामग्री का लेखन किया है। श्री चतुर्वेदी विभिन्न उच्चस्तरीय समितियों के सदस्य भी रहे हैं। भारत सरकार के केन्द्रीय नागर विमानन मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति के राजपत्रित सदस्य होने के साथ ही श्री चतुर्वेदी भारत सरकार के केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, केन्द्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय, केन्द्रीय वित्त मंत्रालय (राजस्व) की हिन्दी सलाहकार समिति के राजपत्रित सदस्य रहे हैं। श्री यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी को संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वरिष्ठ अध्येतावृत्ति (Senior Fellowship) अवॉर्ड-2019 और तिरुपति तिरुमलई देवस्थानम्, आंध्र प्रदेश से वैदिक अनुसंधान प्रकाशन अनुदान सम्मान 1995-96 सहित कई सम्मान प्राप्त हैं।
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