बच्चों के गुलज़ार : पोटली बाबा की – इक था बचपन
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गुलज़ार के बाल-साहित्य और सिनेमा पर केंद्रित ये अनूठी किताबें हर उस इंसान के लिए एक अनमोल ख़ज़ाना हैं जो कभी बच्चा था। गुलज़ार एक विशाल व्यक्तित्व हैं—एक कवि, निर्देशक, गीतकार और कहानीकार, जिनके लिखे अल्फ़ाज़ के जादू ने हर दिल को छुआ है। हालाँकि उनके गीतों, फिल्मों और कविताओं के बारे में कई किताबें लिखी गईं हैं, लेकिन किसी भी किताब ने छह से अधिक यादगार दशकों में रचे गए उनके बाल-साहित्य और सिनेमा के असाधारण उपहार का सही मायने में जश्न नहीं मनाया है। दो पुस्तकों का यह उत्कृष्ट संग्रह अंततः उस कमी को पूरा करता है, और गुलज़ार द्वारा बचपन और युवा मन के लिए रची गई मनमोहक दुनिया पर रौशनी डालता है। धैर्य और प्रशंसा के एक दुर्लभ मिश्रण के साथ, मोहित कटारिया वर्षों के अथक शोध और गुलज़ार के साथ की गई हार्दिक बातचीत को एक साथ लाते हैं ताकि बच्चों के लिए किए उनके काम का एक मुकम्मल चित्र बेहद मोहब्बत के साथ पेश किया जा सके। ये किताबें गुलज़ार की कहानी कहने की कला के कई धागों को धीरे से खोलती और फिर से बुनती हैं। गुलज़ार ने कविताओं, फ़िल्मों, गीतों, कहानियों, त्रिवेणियों, मज़ेदार संवादों, टेलीविजन, रंगमंच, और विज्ञापनों के माध्यम से बचपन की हर एक ख़ुशी, मासूमियत और आश्चर्य को बुना है ।
गुलज़ार के बाल-साहित्य और सिनेमा पर केंद्रित ये अनूठी किताबें हर उस इंसान के लिए एक अनमोल ख़ज़ाना हैं जो कभी बच्चा था। गुलज़ार एक विशाल व्यक्तित्व हैं—एक कवि, निर्देशक, गीतकार और कहानीकार, जिनके लिखे अल्फ़ाज़ के जादू ने हर दिल को छुआ है। हालाँकि उनके गीतों, फिल्मों और कविताओं के बारे में कई किताबें लिखी गईं हैं, लेकिन किसी भी किताब ने छह से अधिक यादगार दशकों में रचे गए उनके बाल-साहित्य और सिनेमा के असाधारण उपहार का सही मायने में जश्न नहीं मनाया है। दो पुस्तकों का यह उत्कृष्ट संग्रह अंततः उस कमी को पूरा करता है, और गुलज़ार द्वारा बचपन और युवा मन के लिए रची गई मनमोहक दुनिया पर रौशनी डालता है। धैर्य और प्रशंसा के एक दुर्लभ मिश्रण के साथ, मोहित कटारिया वर्षों के अथक शोध और गुलज़ार के साथ की गई हार्दिक बातचीत को एक साथ लाते हैं ताकि बच्चों के लिए किए उनके काम का एक मुकम्मल चित्र बेहद मोहब्बत के साथ पेश किया जा सके। ये किताबें गुलज़ार की कहानी कहने की कला के कई धागों को धीरे से खोलती और फिर से बुनती हैं। गुलज़ार ने कविताओं, फ़िल्मों, गीतों, कहानियों, त्रिवेणियों, मज़ेदार संवादों, टेलीविजन, रंगमंच, और विज्ञापनों के माध्यम से बचपन की हर एक ख़ुशी, मासूमियत और आश्चर्य को बुना है ।
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