Deendayal Upadhyaya 100 Inspirational Stories
Deendayal Upadhyaya 100 Inspirational Stories Original price was: ₹400.Current price is: ₹300.
Back to products
Parvarish Karen to
 Aise Karen
Parvarish Karen to Aise Karen Original price was: ₹400.Current price is: ₹300.

Bahar Main Main Andar

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Amit Srivastava
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
Amit Srivastava
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹300.Current price is: ₹225.

In stock

Ships within:
7-10 Days

In stock

ISBN:
Page Extent:
144

अमित इधर कविता के इलाके में कदम रखनेवाले प्रतिभावान युवा हैं। ‘बाहर मैं…मैं अंदर…’ उनका पहला संग्रह है। दो हिस्से हैं इसके, जिसमें ‘मैं अंदर’ की शीर्षकविहीन कविताएँ हैं, वह कवि का आत्म है, उसका व्यक्तित्व ही उन कविताओं का शीर्षक हो सकता था। इस ‘अंदर’ में छटपटाहट बाहर के दबावों की भी है। इस अंदर में वह खुद अपना ईश्वर है। हमारे भीतर के कई हमों को व्यक्त करती ये कविताएँ सामाजिक बयानों से उतनी दूर भी नहीं, जितना कवि ने अपने आमुख में बताया है। वहाँ उसे हिचकियाँ आती हैं, वहाँ फूटती बिवाइयों को बिना किसी दया के आग्रह के वह न सिर्फ एक नमकीन निराशा के साथ रहने देना चाहता है, बल्कि चाकू लेकर छीलने भी बैठ जाता है। ‘बाहर’ की कविता में अमरीका की दादागिरी के नाम एक क्षोभ पत्र है। कश्मीर से एक हालिया मुलाकात का ब्योरा है, जिसमें कश्मीरियों की गरीबी, झील की झल्लाहट और उस सुंदर प्रकृति की बेबसी के कई दुःखद बिंब हैं—यहाँ कश्मीर एक बेवा है, जो पानी के पन्ने पर तारीखें काढ़ा करती है और एक नाव वाला पूछता है कि अपने बच्चों को खाना किसे अच्छा लगता है…संग्रह में ऐसी और कितनी ही कविताएँ हैं, जो बताती हैं कि कवि जब बाहर होता है तो उसका तआल्लुक वैचारिक संघर्ष के किस संसार से है—पाठक स्वयं उनमें प्रवेश करेंगे। अमित की कविताओं में दर्ज अनुभव और विचार भरोसा दिलाते हैं कि यह युवा लंबे सफर पर निकला है। अमित की कविता कहीं से भी समतल में चलने की हामी नहीं लगती, वह भरपूर जोखिम उठाती है। —शिरीष कुमार मौर्य.

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Bahar Main Main Andar”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Description

अमित इधर कविता के इलाके में कदम रखनेवाले प्रतिभावान युवा हैं। ‘बाहर मैं…मैं अंदर…’ उनका पहला संग्रह है। दो हिस्से हैं इसके, जिसमें ‘मैं अंदर’ की शीर्षकविहीन कविताएँ हैं, वह कवि का आत्म है, उसका व्यक्तित्व ही उन कविताओं का शीर्षक हो सकता था। इस ‘अंदर’ में छटपटाहट बाहर के दबावों की भी है। इस अंदर में वह खुद अपना ईश्वर है। हमारे भीतर के कई हमों को व्यक्त करती ये कविताएँ सामाजिक बयानों से उतनी दूर भी नहीं, जितना कवि ने अपने आमुख में बताया है। वहाँ उसे हिचकियाँ आती हैं, वहाँ फूटती बिवाइयों को बिना किसी दया के आग्रह के वह न सिर्फ एक नमकीन निराशा के साथ रहने देना चाहता है, बल्कि चाकू लेकर छीलने भी बैठ जाता है। ‘बाहर’ की कविता में अमरीका की दादागिरी के नाम एक क्षोभ पत्र है। कश्मीर से एक हालिया मुलाकात का ब्योरा है, जिसमें कश्मीरियों की गरीबी, झील की झल्लाहट और उस सुंदर प्रकृति की बेबसी के कई दुःखद बिंब हैं—यहाँ कश्मीर एक बेवा है, जो पानी के पन्ने पर तारीखें काढ़ा करती है और एक नाव वाला पूछता है कि अपने बच्चों को खाना किसे अच्छा लगता है…संग्रह में ऐसी और कितनी ही कविताएँ हैं, जो बताती हैं कि कवि जब बाहर होता है तो उसका तआल्लुक वैचारिक संघर्ष के किस संसार से है—पाठक स्वयं उनमें प्रवेश करेंगे। अमित की कविताओं में दर्ज अनुभव और विचार भरोसा दिलाते हैं कि यह युवा लंबे सफर पर निकला है। अमित की कविता कहीं से भी समतल में चलने की हामी नहीं लगती, वह भरपूर जोखिम उठाती है। —शिरीष कुमार मौर्य.

About Author

अमित श्रीवास्तव जन्म एवं शिक्षा जौनपुर, उत्तर प्रदेश में। कुछ समय विदेश व्यापार निदेशालय, भारत सरकार में हिंदी अनुवादक का कार्य करने के बाद अब उत्तराखंड पुलिस सेवा में अपर पुलिस अधीक्षक। ‘भारत में भूमंडलीकरण की अवधारणा एवं समकालीन हिंदी कविता पर उसका प्रभाव’ विषय पर कुमाऊँ विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं/ऑनलाइन पत्रिकाओं में कविताएँ एवं लेख प्रकाशित। ‘पहला दखल’ (संस्मरण) वर्ष 2015 में प्रकाशित।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Bahar Main Main Andar”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[wt-related-products product_id="test001"]

RELATED PRODUCTS

RECENTLY VIEWED