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बवाली कनपुरिया : यूपी के दुर्दांत विकास दुबे की अपराधगाथा

Publisher:
Penguin
| Author:
Dr. Sanjeev Mishra
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Penguin
Author:
Dr. Sanjeev Mishra
Language:
Hindi
Format:
Paperback

Original price was: ₹250.Current price is: ₹200.

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7-10 Days

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ISBN:
Category:
Page Extent:
200

गैंगस्टर विकास दुबे 10 जुलाई 2020 को पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। उसकी मौत से उसके जीवन की कहानी सामने आई और सामने आया चेहरा एक बेखौफ़ अपराधी, एक गैंगस्टर और एक हत्यारे का जिसने पुलिस अफसरों तक को न छोड़ा।
उनके ख़िलाफ अपराधों की लंबी फ़ेहरिस्त में शामिल है उसके अपने शिक्षक, सिद्धेश्वर पांडेय की दिन-दहाड़े हत्या करना, उत्तर प्रदेश के मंत्री संतोष शुक्ल का थाने में घुस कर क़त्ल कर देना और झुन्ना बाबा की हत्या के ज़रिए एक ऐसे भू-माफ़िया का ऐलान कर देना जिसकी पहुँच बहुत दूर तक और बहुत ऊपर तक जाती थी।
आखिर कैसे हुआ इस अपराधी का उदय? किन हालात में वह अपराधी बना और वो कौन सी ताक़तें थीं जिनकी वजह से इतने सालों तक बचा ही नहीं रहा बल्कि नेता तक बन गया।
बवाली कनपुरिया विकास दुबे के जीवन का ऐसा कच्चा-चिट्ठा है जो पड़ताल भी करता है की एक साधारण से परिवार का मेधावी बच्चा अपराधों के ऐसे गर्त में कैसे गिर गया कि वहाँ से फिर निकल नहीं पाया।

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गैंगस्टर विकास दुबे 10 जुलाई 2020 को पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। उसकी मौत से उसके जीवन की कहानी सामने आई और सामने आया चेहरा एक बेखौफ़ अपराधी, एक गैंगस्टर और एक हत्यारे का जिसने पुलिस अफसरों तक को न छोड़ा।
उनके ख़िलाफ अपराधों की लंबी फ़ेहरिस्त में शामिल है उसके अपने शिक्षक, सिद्धेश्वर पांडेय की दिन-दहाड़े हत्या करना, उत्तर प्रदेश के मंत्री संतोष शुक्ल का थाने में घुस कर क़त्ल कर देना और झुन्ना बाबा की हत्या के ज़रिए एक ऐसे भू-माफ़िया का ऐलान कर देना जिसकी पहुँच बहुत दूर तक और बहुत ऊपर तक जाती थी।
आखिर कैसे हुआ इस अपराधी का उदय? किन हालात में वह अपराधी बना और वो कौन सी ताक़तें थीं जिनकी वजह से इतने सालों तक बचा ही नहीं रहा बल्कि नेता तक बन गया।
बवाली कनपुरिया विकास दुबे के जीवन का ऐसा कच्चा-चिट्ठा है जो पड़ताल भी करता है की एक साधारण से परिवार का मेधावी बच्चा अपराधों के ऐसे गर्त में कैसे गिर गया कि वहाँ से फिर निकल नहीं पाया।

About Author

Dr. Sanjeev Mishra has received several journalistic fellowships in India along with a fellowship on environment change from Cornell University, USA. During Hindi Journalism more than twenty four years, he has made a journalistic journey from reporter to editor in Independent India, Aaj, Dainik Jagran, National World, Hribhoomi, Rajasthan Patrika Group. Dainik Jagran, Amar Ujala, Lokmat Samachaar, Aaj Samaaj, Rajasthan Patrika and Jansatta have regularly written in editorial consultations of various newspapers. His stories have also been published in major newspapers and literature magazines of the country. Presently, he is working as an Assistant Professor in the Managing Faculty of State-HBTI, Kanpur.

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