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Mahabharat Mein
 Matri Vandana
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Belag Lapet

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
R.K. Sinha
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
R.K. Sinha
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹500.Current price is: ₹375.

In stock

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7-10 Days

In stock

ISBN:
Page Extent:
312

इस पुस्तक का हर लेख एक विषय पर केंद्रित है। किसी को कम श्रेष्ठ कहना कठिन काम है। पुस्तक के लेखों का समग्र फलक बहुत बड़ा है। इसकी व्यापकता में राजनीति, संसद्, राजनीतिक मर्यादा, संस्कृति, राजनीतिक इतिहास, शिक्षा, देश के ज्वंलत प्रश्न, हिंदू-मुसलिम संबंध, पाकिस्तान और काला धन आदि विषय समाए हुए हैं। राजनीति के केंद्र और परिधि में जो-जो विषय आ सकते हैं, उन्हें इसमें पाया जा सकता है। एक अर्थ में यह कहना ज्यादा उचित है कि इसमें समसामयिक विषयों में से कुछ छूटा ही नहीं है। सब कुछ आ गया है। विषय अलग-अलग हैं। इन्हें पढ़ते हुए पाठक भाषा का मनोरम प्रवाह अनुभव कर सकेंगे। उलझाव तो कहीं नहीं है। एक राजनीतिक दल के नेता और सांसद की कलम पर कई बार इतना बोझ आ जाता है कि वह ठिठक जाती है। कुंठित हो जाती है। इसे लेखन में लेखक कोशिश कर छिपाता है, पर वह छिपता नहीं है। रवींद्र किशोर सिन्हा ने न तो बोझ महसूस किया है और न ही वे लेखन में कहीं से पाठक को गुफाओं से गुजारते हैं। इसलिए इन लेखों को पढ़ते हुए किसी गुफा से गुजरने की ऊब नहीं होती। हर पाठक अनुभव कर सकता है कि वह पौ फटने की बेला में है। नया दिन नए विचार और नए दृष्टिकोण से शुरू करने का उसे सुअवसर प्राप्त हो रहा है। अपनी राजनीतिक-सांस्कृतिक निष्ठा बनाए रखते हुए वे पेशेवर मर्यादाओं का अपने लेखों में पूरा पालन करते देखे जा सकते हैं। —इसी पुस्तक से.

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Description

इस पुस्तक का हर लेख एक विषय पर केंद्रित है। किसी को कम श्रेष्ठ कहना कठिन काम है। पुस्तक के लेखों का समग्र फलक बहुत बड़ा है। इसकी व्यापकता में राजनीति, संसद्, राजनीतिक मर्यादा, संस्कृति, राजनीतिक इतिहास, शिक्षा, देश के ज्वंलत प्रश्न, हिंदू-मुसलिम संबंध, पाकिस्तान और काला धन आदि विषय समाए हुए हैं। राजनीति के केंद्र और परिधि में जो-जो विषय आ सकते हैं, उन्हें इसमें पाया जा सकता है। एक अर्थ में यह कहना ज्यादा उचित है कि इसमें समसामयिक विषयों में से कुछ छूटा ही नहीं है। सब कुछ आ गया है। विषय अलग-अलग हैं। इन्हें पढ़ते हुए पाठक भाषा का मनोरम प्रवाह अनुभव कर सकेंगे। उलझाव तो कहीं नहीं है। एक राजनीतिक दल के नेता और सांसद की कलम पर कई बार इतना बोझ आ जाता है कि वह ठिठक जाती है। कुंठित हो जाती है। इसे लेखन में लेखक कोशिश कर छिपाता है, पर वह छिपता नहीं है। रवींद्र किशोर सिन्हा ने न तो बोझ महसूस किया है और न ही वे लेखन में कहीं से पाठक को गुफाओं से गुजारते हैं। इसलिए इन लेखों को पढ़ते हुए किसी गुफा से गुजरने की ऊब नहीं होती। हर पाठक अनुभव कर सकता है कि वह पौ फटने की बेला में है। नया दिन नए विचार और नए दृष्टिकोण से शुरू करने का उसे सुअवसर प्राप्त हो रहा है। अपनी राजनीतिक-सांस्कृतिक निष्ठा बनाए रखते हुए वे पेशेवर मर्यादाओं का अपने लेखों में पूरा पालन करते देखे जा सकते हैं। —इसी पुस्तक से.

About Author

राजनीतिशास्त्र से स्नातक श्री आर.के. सिन्हा ने अपने कॅरियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की। सन् 1966 से 70 तक ‘हिंदुस्थान समाचार’ और सन् 1970 से 1974 तक ‘सर्चलाइट’ व ‘प्रदीप’ में कार्यालय-संवाददाता का कार्य किया। सन् 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में युद्ध-संवाददाता की भूमिका निभाई। इस दौरान पाक सैनिकों द्वारा बंदी भी बनाए गए और बाद में किसी तरह भाग निकले। सन् 1974-75 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन में भाग लिया और ‘जन आंदोलन’ पर पहली पुस्तक लिखी। उन्होंने सन् 1974 में ‘सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज इंडिया’ (एस.आई.एस.) की स्थापना की। एक निजी सुरक्षा विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने अमेरिका, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, जापान, इंग्लैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, इटली, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, मॉरीशस, सिंगापुर, हांगकांग, फिलिपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, बर्मा, बँगलादेश, भूटान, टर्की, नेपाल, चीन सहित कई अरब देशों का भ्रमण किया। अनेक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संस्थानों में महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे। सुरक्षा विषयक सात महत्त्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित। अंग्रेजी में च्रूद्ग ड्डठ्ठस्र रू4 त्रह्वह्म्ह्वज् × च्क्च4 ह्लद्धद्ग ङ्खड्ड4ज् एवं हिंदी में ‘महामानव मृत्युंजय’ तथा ‘बेलाग लपेट’ मुख्य हैं। सन् 1999-2004 के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासनकाल में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, विज्ञान व तकनीकी एवं समुद्री विकास मंत्रालय में सुरक्षा सलाहकार रहे। बहुआयामी प्रतिभा के धनी आर.के. सिन्हा ने देहरादून में ‘द इंडियन पब्लिक स्कूल’ की स्थापना की। वे कई सामाजिक और कल्याणकारी संस्थाओं के अध्यक्ष हैं। फरवरी 2014 में ‘भारतीय जनता पार्टी’ की ओर से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। ‘हिंदुस्थान समाचार सेवा’ के संरक्षक हैं।.

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