Sansad mein Vikas
 Ki Baaten
Sansad mein Vikas Ki Baaten Original price was: ₹900.Current price is: ₹675.
Back to products
Aarthik Vatavaran :
 Badalte Aayam
Aarthik Vatavaran : Badalte Aayam Original price was: ₹700.Current price is: ₹525.

Bharat Aur Europeeya Sangh : Ek Antrang Drishtikon

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Bhaswati Mukherjee
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
Bhaswati Mukherjee
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹800.Current price is: ₹600.

In stock

Ships within:
7-10 Days

In stock

ISBN:
Page Extent:
314

एक प्रचलित मान्यता के मुताबिक भारत-यूरोपीय संघ के संबंध को ब्रिटिश प्रिज्म के जरिए बेहतर ढंग से देखा जा सकता है। यह मान्यता भारत में सिकंदर के आगमन और रोमन साम्राज्य के भारत के साथ व्यापार जैसे ऐतिहासिक प्रमाण को नजरअंदाज करती है। हाल के समय में सांस्कृतिक शख्सियत सत्यजित रे कहीं और के बजाय पेरिस में ज्यादा मशहूर हैं। यूरोपीय संघ के साथ भारत का व्यापार, विशेष रूप से रक्षा संबंधी सामानों के मामले में चैनल के इर्द-गिर्द के देशों में ही नहीं, एक हद तक पूरे महादेश में फैला हुआ है। ब्रेक्सिट अब उस ब्रिटिश प्रिज्म को हटा लेनेवाला है। एक ताजा और कई मायनों में भारत-यूरोपीय संघ का एक नया संबंध उभरकर आने वाला है। भास्वती मुखर्जी की पुस्तक ‘भारत और यूरोपीय संघ: एक अंतरंग दृष्टिकोण’ बहुत ही सामयिक है। यह अतीत की रूपरेखा को पेश करती है, तमाम जटिलताओं के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति की व्याख्या करती है और भविष्यवाणी भी करती है। यह बहुत ही सफल माने जाने वाले पेशेवर द्वारा एक वस्तुपरक आकलन है, जो अतीत के संबंधों की समस्याओं पर नजर डालते हुए भारत-यूरोपीय संघ के अधिक सुदृढ़ भविष्य के मद्देनजर व्यावहारिक कदम भी है। एक बेहतर धाराप्रवाहिका के साथ लिखा गया ‘भारत और यूरोपीय संघ: एक अंतरंग दृष्टिकोण’ के शब्दचित्र आकर्षित करते हैं, जो इसे अनूठा और निश्चित रूप से पढ़े जानेवाला बनाते ह|

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Bharat Aur Europeeya Sangh : Ek Antrang Drishtikon”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Description

एक प्रचलित मान्यता के मुताबिक भारत-यूरोपीय संघ के संबंध को ब्रिटिश प्रिज्म के जरिए बेहतर ढंग से देखा जा सकता है। यह मान्यता भारत में सिकंदर के आगमन और रोमन साम्राज्य के भारत के साथ व्यापार जैसे ऐतिहासिक प्रमाण को नजरअंदाज करती है। हाल के समय में सांस्कृतिक शख्सियत सत्यजित रे कहीं और के बजाय पेरिस में ज्यादा मशहूर हैं। यूरोपीय संघ के साथ भारत का व्यापार, विशेष रूप से रक्षा संबंधी सामानों के मामले में चैनल के इर्द-गिर्द के देशों में ही नहीं, एक हद तक पूरे महादेश में फैला हुआ है। ब्रेक्सिट अब उस ब्रिटिश प्रिज्म को हटा लेनेवाला है। एक ताजा और कई मायनों में भारत-यूरोपीय संघ का एक नया संबंध उभरकर आने वाला है। भास्वती मुखर्जी की पुस्तक ‘भारत और यूरोपीय संघ: एक अंतरंग दृष्टिकोण’ बहुत ही सामयिक है। यह अतीत की रूपरेखा को पेश करती है, तमाम जटिलताओं के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति की व्याख्या करती है और भविष्यवाणी भी करती है। यह बहुत ही सफल माने जाने वाले पेशेवर द्वारा एक वस्तुपरक आकलन है, जो अतीत के संबंधों की समस्याओं पर नजर डालते हुए भारत-यूरोपीय संघ के अधिक सुदृढ़ भविष्य के मद्देनजर व्यावहारिक कदम भी है। एक बेहतर धाराप्रवाहिका के साथ लिखा गया ‘भारत और यूरोपीय संघ: एक अंतरंग दृष्टिकोण’ के शब्दचित्र आकर्षित करते हैं, जो इसे अनूठा और निश्चित रूप से पढ़े जानेवाला बनाते ह|

About Author

भास्वती मुखर्जी विदेश-सेवा के अधिकारी के रूप में भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों पर सबसे अधिक अनुभव रखनेवाले राजनयिकों में भास्वती मुखर्जी की एक अलग प्रतिष्ठा है। यूरोपीय संघ के मामलों में भारतीय विदेश मंत्रालय में उन्होंने विशेषज्ञता के साथ सबसे लंबे समय तक नेतृत्व किया है। इस अवधि के दौरान उन्होंने संबंधों को अधिक-से-अधिक संजीदगी और स्थिरता देने के लिए सालाना भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलनों जैसे संस्थागत संबंधों का मार्गदर्शन किया। 38 वर्ष से अधिक समय के प्रतिष्ठित कॅरियर में वे नीदरलैंड में भारतीय राजदूत होने के साथ ही पेरिस, यूनेस्को में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रही हैं। भारत की ओर से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मिशन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में छह साल के कार्यकाल में और जिनेवा में मानवाधिकारों के लिए पहले उच्चायुक्त के रूप में उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता को और अधिक प्रखर किया। बहुत कम उम्र से उन्होंने सार्वजनिक संपर्क की शुरुआत की। मिरांडा कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में चुने जाने पर मानवाधिकार और महिला अधिकारों के लिए तथा बाद में निरस्त्रीकरण एवं कूटनीतिक मामलों से लेकर विरासत व संस्कृति के लिए अपने जुनून को आगे बढ़ाने का उनमें भरोसा बढ़ा। इसके अलावा भास्वती मुखर्जी एक प्रशिक्षित गायिका हैं। एक बेहतरीन सार्वजनिक वक्ता के रूप में भारतीय मीडिया में वे विदेश नीति और रणनीतिक मामलों में एक प्रभावशाली आवाज रही हैं|

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Bharat Aur Europeeya Sangh : Ek Antrang Drishtikon”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[wt-related-products product_id="test001"]

RELATED PRODUCTS

RECENTLY VIEWED