CHINTAMANI
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“चिंतामणि भाग-I (विचारात्मक निबंध) विथ मंजूषा” नामक पुस्तक एक महत्वपूर्ण साहित्यिक काम है जिसे आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखा गया है। यह पुस्तक विचारात्मक निबंधों का एक संग्रह है जो विभिन्न साहित्यिक और दार्शनिक मुद्दों पर चर्चा करता है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल एक प्रमुख हिंदी लेखक और भाषा विद्वान थे, और उन्होंने भारतीय साहित्य और दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर गहरा विचार किया। “चिंतामणि भाग-I” में उनके कई महत्वपूर्ण निबंध शामिल हैं, जैसे “कविता क्या है,” “श्रद्धा और भक्ति,” और “15 अन्य निबंध.”
इस पुस्तक में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने विभिन्न साहित्यिक और दार्शनिक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण को साझा किया है और विचारशील उपाधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बहस प्रस्तुत की है।
यह पुस्तक हिंदी साहित्य और भारतीय दर्शन के प्रति रुचि रखने वालों के लिए एक मूल्यवान स्रोत है और आचार्य रामचंद्र शुक्ल के विचारों और दृष्टिकोण को समझने और समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
“चिंतामणि भाग-I (विचारात्मक निबंध) विथ मंजूषा” नामक पुस्तक एक महत्वपूर्ण साहित्यिक काम है जिसे आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखा गया है। यह पुस्तक विचारात्मक निबंधों का एक संग्रह है जो विभिन्न साहित्यिक और दार्शनिक मुद्दों पर चर्चा करता है।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल एक प्रमुख हिंदी लेखक और भाषा विद्वान थे, और उन्होंने भारतीय साहित्य और दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर गहरा विचार किया। “चिंतामणि भाग-I” में उनके कई महत्वपूर्ण निबंध शामिल हैं, जैसे “कविता क्या है,” “श्रद्धा और भक्ति,” और “15 अन्य निबंध.”
इस पुस्तक में आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने विभिन्न साहित्यिक और दार्शनिक मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण को साझा किया है और विचारशील उपाधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बहस प्रस्तुत की है।
यह पुस्तक हिंदी साहित्य और भारतीय दर्शन के प्रति रुचि रखने वालों के लिए एक मूल्यवान स्रोत है और आचार्य रामचंद्र शुक्ल के विचारों और दृष्टिकोण को समझने और समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
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