Dilli Ab Door Nahin Original price was: ₹215.Current price is: ₹161.

Save: 25%

Back to products
Bolegi Na Bulbul Ab Original price was: ₹295.Current price is: ₹221.

Save: 25%

Dilli Ab Door Nahin

Publisher:
Rajpal and Sons
| Author:
Ruskin Bond
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Rajpal and Sons
Author:
Ruskin Bond
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹295.Current price is: ₹221.

Save: 25%

Out of stock

Ships within:
7-10 Days

Out of stock

Book Type

Availiblity

Discount
ISBN:
SKU 9789350642597 Category
Category:
Page Extent:
112

धूल और सुस्ती में लिपटा पीपलनगर उत्तर भारत का एक छोटा-सा शहर है जहाँ जि़न्दगी बड़ी धीमी गति से चलती है और एक दिन से दूसरे दिन में कोई फर्क नहीं लगता। न कोई बड़ी घटना घटती और न ही बड़ी कोई खबर पैदा होती है। छोटे-से पीपल नगर के वासियों के सपने भी छोटे हैं जिनकी उड़ान दिल्ली पहुँच कर रुक जाती है। नाई दीपचंद का सपना है दिल्ली जाकर अपनी दुकान खोले और प्रधानमंत्री के बाल काटे। साइकिल-रिक्शा की जगह दिल्ली में स्कूटर-रिक्शा चलाना पीतांबर का सपना है और अज़ीज चाँदनी चैक में अपनी कबाड़ी की दुकान खोलने का सपना देखता है। अपने को लेखक समझने वाला अरुण जासूसी उपन्यास लिखने के सपने देखता है और वेश्या कमला से भी प्यार करता है। इनमें से कौन अपने सपने पूरे कर पाते हैं और कौन पीपल नगर में ही रह जाते हैं-पढि़ए इस उपन्यास में। सरल भाषा चुस्त कहानी और दिल को छू लेने वाले किस्सों से भरपूर रस्किन बांड का यह उपन्यास पाठकों को बहुत देर तक याद रहेगा। “वर्तमान भारत के एक बेहतरीन कहानीकार” – ट्रिब्यून “एक लाजवाब किताब”- आउट्लुक

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Dilli Ab Door Nahin”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You have to be logged in to be able to add photos to your review.

Description

धूल और सुस्ती में लिपटा पीपलनगर उत्तर भारत का एक छोटा-सा शहर है जहाँ जि़न्दगी बड़ी धीमी गति से चलती है और एक दिन से दूसरे दिन में कोई फर्क नहीं लगता। न कोई बड़ी घटना घटती और न ही बड़ी कोई खबर पैदा होती है। छोटे-से पीपल नगर के वासियों के सपने भी छोटे हैं जिनकी उड़ान दिल्ली पहुँच कर रुक जाती है। नाई दीपचंद का सपना है दिल्ली जाकर अपनी दुकान खोले और प्रधानमंत्री के बाल काटे। साइकिल-रिक्शा की जगह दिल्ली में स्कूटर-रिक्शा चलाना पीतांबर का सपना है और अज़ीज चाँदनी चैक में अपनी कबाड़ी की दुकान खोलने का सपना देखता है। अपने को लेखक समझने वाला अरुण जासूसी उपन्यास लिखने के सपने देखता है और वेश्या कमला से भी प्यार करता है। इनमें से कौन अपने सपने पूरे कर पाते हैं और कौन पीपल नगर में ही रह जाते हैं-पढि़ए इस उपन्यास में। सरल भाषा चुस्त कहानी और दिल को छू लेने वाले किस्सों से भरपूर रस्किन बांड का यह उपन्यास पाठकों को बहुत देर तक याद रहेगा। “वर्तमान भारत के एक बेहतरीन कहानीकार” – ट्रिब्यून “एक लाजवाब किताब”- आउट्लुक

About Author

‘साहित्य अकादमी’ पुरस्कार, ‘पद्मश्री’ और ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित रस्किन बांड की रूम आन द रूफ, वे आवारा दिन, उड़ान, दिल्ली अब दूर नहीं और एडवेंचर्स आफ़ रस्टी अन्य लोकप्रिय पुस्तकें हैं। "रस्किन बांड की कहानियों में एक ताज़गी है। भारत के नज़ारों और जीवन के बारे में शायद ही किसी और लेखक ने इतने सहज और प्रामाणिक रूप से लिखा होगा...हरेक कहानी जि़न्दगी के एक धड़कते दिल का आईना है।" -नेशनल हैरल्ड

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Dilli Ab Door Nahin”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You have to be logged in to be able to add photos to your review.

[wt-related-products product_id="test001"]

RELATED PRODUCTS

RECENTLY VIEWED