Description
धूल और सुस्ती में लिपटा पीपलनगर उत्तर भारत का एक छोटा-सा शहर है जहाँ जि़न्दगी बड़ी धीमी गति से चलती है और एक दिन से दूसरे दिन में कोई फर्क नहीं लगता। न कोई बड़ी घटना घटती और न ही बड़ी कोई खबर पैदा होती है। छोटे-से पीपल नगर के वासियों के सपने भी छोटे हैं जिनकी उड़ान दिल्ली पहुँच कर रुक जाती है। नाई दीपचंद का सपना है दिल्ली जाकर अपनी दुकान खोले और प्रधानमंत्री के बाल काटे। साइकिल-रिक्शा की जगह दिल्ली में स्कूटर-रिक्शा चलाना पीतांबर का सपना है और अज़ीज चाँदनी चैक में अपनी कबाड़ी की दुकान खोलने का सपना देखता है। अपने को लेखक समझने वाला अरुण जासूसी उपन्यास लिखने के सपने देखता है और वेश्या कमला से भी प्यार करता है। इनमें से कौन अपने सपने पूरे कर पाते हैं और कौन पीपल नगर में ही रह जाते हैं-पढि़ए इस उपन्यास में। सरल भाषा चुस्त कहानी और दिल को छू लेने वाले किस्सों से भरपूर रस्किन बांड का यह उपन्यास पाठकों को बहुत देर तक याद रहेगा। “वर्तमान भारत के एक बेहतरीन कहानीकार” – ट्रिब्यून “एक लाजवाब किताब”- आउट्लुक





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