EK KHWAIHISH NE (HINDI)
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मृदुला बाजपेयी अपनी कहानियों के ज़रिए पाठकों को ज़िंदगी के ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ आगे बढ़ने के लिए फैसला करना ज़रूरी हो जाता है | एक ख़्वाहिश ने… रिश्तों का ऐसा ताना-बाना है, जिसमें प्यार भी है, कुर्बानी भी, साहस भी और अप्रत्याशित निर्णय भी | हिबा, तारा और आकाश की भावनाओं को गहराई से नाप कर शब्दों में ढाला गया है | आकाश एक फ़ौजी अफ़सर है जो युद्ध के मैदान से सकुशल लौट आया है, जबकि तारा बहुत भावुक है, जिसके लिए ज़िंदगी की छोटी छोटी बातें भी बहुत अहमियत रखती हैं | तारा कहानी की मुख्य किरदार हैं जो प्यार और रिश्तों को ज़िंदगी में पहली प्राथमिकता देती है वहीँ आकाश अपने घर की परिस्थियों से तालमेल नहीं बैठा पा रहा था और तारा के लिए अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने में समरूप नहीं रह पता था|और इन दोनों किरदारों को जो डोर जोड़ कर रखती है, वह है उनकी प्यारी बेटी हिबा |अपनी उम्र से बढ़कर सोचने वाली नन्ही हिबा को माँ का प्यार तो नसीब हुआ लेकिन पिता से दूरी और उनके अस्तित्व से अनजानापन उसे भीतर ही भीतर परेशान करता रहा | उधर एक सैनिंक होने के नाते आकाश अपने कर्तव्य से मुँह नहीँ मोड़ सकता था, और साथ ही उसके परिवार के बीच के सदस्यों का तनाव भी उससे छिपा नहीँ था | भावनात्मक संघर्ष और रिश्तों में बढ़ती उलझनें कहानी को आगे ले जाती हैं और पुस्तक का समापन कुछ अलग ही ढंग से होता है I यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जो वास्तविक जीवन से जुड़े होने का अहसास कराती है व हमें लगता है जैसे यह हमारे आस – पास घटने वाली ही कोई कहानी है |
मृदुला बाजपेयी अपनी कहानियों के ज़रिए पाठकों को ज़िंदगी के ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ आगे बढ़ने के लिए फैसला करना ज़रूरी हो जाता है | एक ख़्वाहिश ने… रिश्तों का ऐसा ताना-बाना है, जिसमें प्यार भी है, कुर्बानी भी, साहस भी और अप्रत्याशित निर्णय भी | हिबा, तारा और आकाश की भावनाओं को गहराई से नाप कर शब्दों में ढाला गया है | आकाश एक फ़ौजी अफ़सर है जो युद्ध के मैदान से सकुशल लौट आया है, जबकि तारा बहुत भावुक है, जिसके लिए ज़िंदगी की छोटी छोटी बातें भी बहुत अहमियत रखती हैं | तारा कहानी की मुख्य किरदार हैं जो प्यार और रिश्तों को ज़िंदगी में पहली प्राथमिकता देती है वहीँ आकाश अपने घर की परिस्थियों से तालमेल नहीं बैठा पा रहा था और तारा के लिए अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने में समरूप नहीं रह पता था|और इन दोनों किरदारों को जो डोर जोड़ कर रखती है, वह है उनकी प्यारी बेटी हिबा |अपनी उम्र से बढ़कर सोचने वाली नन्ही हिबा को माँ का प्यार तो नसीब हुआ लेकिन पिता से दूरी और उनके अस्तित्व से अनजानापन उसे भीतर ही भीतर परेशान करता रहा | उधर एक सैनिंक होने के नाते आकाश अपने कर्तव्य से मुँह नहीँ मोड़ सकता था, और साथ ही उसके परिवार के बीच के सदस्यों का तनाव भी उससे छिपा नहीँ था | भावनात्मक संघर्ष और रिश्तों में बढ़ती उलझनें कहानी को आगे ले जाती हैं और पुस्तक का समापन कुछ अलग ही ढंग से होता है I यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जो वास्तविक जीवन से जुड़े होने का अहसास कराती है व हमें लगता है जैसे यह हमारे आस – पास घटने वाली ही कोई कहानी है |
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