जोधपुर राज्य का इतिहास: History of Jodhpur State (Set of 2 Volumes)
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जोधपुर राज्य का इतिहास (2 खण्डों में) महामहोपाध्याय राय बहादुर गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रन्थ है। इसमें मारवाड़ क्षेत्र और जोधपुर राज्य की राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गाथा को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। पहले खण्ड में भूगोल, संस्कृति और प्राचीन शासकों से लेकर महाराजा जसवंत सिंह प्रथम तक का इतिहास मिलता है, जबकि दूसरे खण्ड में जसवंत सिंह के बाद अजीत सिंह से लेकर महाराजा मानसिंह तक की घटनाओं और शासन का विस्तृत विवरण दिया गया है।
यह ग्रन्थ अत्यंत प्रामाणिक स्रोतों पर आधारित है। लेखक ने राजस्थानी ग्रन्थों, फारसी अभिलेखों, संस्कृत साहित्य और राज्य के अभिलेखागारों का उपयोग किया है। इस कारण यह पुस्तक सिर्फ घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि एक गहन शोधपरक कृति है, जो पाठक को उस समय के राजनीतिक संघर्ष, युद्ध, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन की सजीव झलक दिखाती है।
पुस्तक का महत्व इस बात में है कि यह जोधपुर राज्य के इतिहास को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करती है और राजस्थानी इतिहास की समझ के लिए एक आधारशिला का काम करती है। यह न केवल शोधार्थियों और इतिहासकारों के लिए, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों और राजस्थान के इतिहास में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए भी एक अमूल्य संदर्भ ग्रन्थ है।
जोधपुर राज्य का इतिहास (2 खण्डों में) महामहोपाध्याय राय बहादुर गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रन्थ है। इसमें मारवाड़ क्षेत्र और जोधपुर राज्य की राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गाथा को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। पहले खण्ड में भूगोल, संस्कृति और प्राचीन शासकों से लेकर महाराजा जसवंत सिंह प्रथम तक का इतिहास मिलता है, जबकि दूसरे खण्ड में जसवंत सिंह के बाद अजीत सिंह से लेकर महाराजा मानसिंह तक की घटनाओं और शासन का विस्तृत विवरण दिया गया है।
यह ग्रन्थ अत्यंत प्रामाणिक स्रोतों पर आधारित है। लेखक ने राजस्थानी ग्रन्थों, फारसी अभिलेखों, संस्कृत साहित्य और राज्य के अभिलेखागारों का उपयोग किया है। इस कारण यह पुस्तक सिर्फ घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि एक गहन शोधपरक कृति है, जो पाठक को उस समय के राजनीतिक संघर्ष, युद्ध, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन की सजीव झलक दिखाती है।
पुस्तक का महत्व इस बात में है कि यह जोधपुर राज्य के इतिहास को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करती है और राजस्थानी इतिहास की समझ के लिए एक आधारशिला का काम करती है। यह न केवल शोधार्थियों और इतिहासकारों के लिए, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों और राजस्थान के इतिहास में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए भी एक अमूल्य संदर्भ ग्रन्थ है।
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