A Whole Lot Of Petu Pumpkin
₹399 Original price was: ₹399.₹319Current price is: ₹319.
Ultimate Reboot
₹395 Original price was: ₹395.₹316Current price is: ₹316.
JP se BJP : Sau Saal Ke Aaine Mein Bihar
Publisher:
Vani Prakashan
| Author:
Santosh Singh I Shubham Kumar
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Vani Prakashan
Author:
Santosh Singh I Shubham Kumar
Language:
Hindi
Format:
Paperback
₹495 Original price was: ₹495.₹396Current price is: ₹396.
In stock
Ships within:
7-10 Days
In stock
ISBN:
Categories: Hindi, New Releases, Politics/Government
Page Extent:
328
आज के भारत की कहानी को समझने के लिए बिहार की यात्रा करना और उसे महसूस करना बेहद जरूरी है — यह एक तरह की तीर्थ यात्रा है, जो आपको ययार्थ से रूबरू करवाती है। यह पुस्तक उस जटिल यात्रा को समझने का कंपास भी है। — राज कमल झा (मुख्य सम्पादक — द इंडियन एक्सप्रेस) **** ‘जेपी से बीजेपी : सौ साल के आईने’ में बिहार पुस्तक में बिहार की राजनीति का सिंहावलोकन भी है और 1952 चुनाव से लेकर 2025 के चुनाव का आकलन भी है। इस कहानी में बिहार की राजनीति के धुरंधर, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद तो हैं ही, भविष्य की राजनीति के दावेदारों की भी चर्चा है। यह त्रिवेणी संघ से तेजस्वी तक की यात्रा है, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह से लेकर कन्हैया कुमार तक का विवरण है। समाजवादी पुरोधा रामनन्दन मिश्र, जगदेव प्रसाद, कर्पूरी ठाकुर, रामानन्द तिवारी और कपिलदेव सिंह से गुज़रते हुए कांग्रेस की पूरी यात्रा भी है, उसकी थकान की दास्तां भी है, राहुल गांधी के पार्टी पुनर्जागरण का प्रयास भी है। समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण तो किताब के केन्द्र में हैं। समाजवाद से राष्ट्रवाद की यात्रा में जितने पड़ाव हैं, यह किताब सभी पड़ावों से गुजरती हैं। कैसे रामविलास पासवान तीन बार मुख्यमन्त्री बनने से चूक गये, लालू प्रसाद ने कैसे सत्ता पायी, शरद यादव बिहार कैसे आये और चारा घोटाले की अनकही कहानी क्या है? चिराग पासवान, सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के पुत्र प्रशान्त कुमार की क्या कहानी है? चुनावी रणनीतिकार प्रशान्त किशोर के नेता बनने की कैसी यात्रा है और क्यों बीजेपी अभी भी समाजवाद के आखिरी स्तम्भ नीतीश कुमार को डिकोड नहीं कर पा रही है? – इन सब जटिल विमर्शो पर किताब में बात की गयी है।
Be the first to review “JP se BJP : Sau Saal Ke Aaine Mein Bihar” Cancel reply
Description
आज के भारत की कहानी को समझने के लिए बिहार की यात्रा करना और उसे महसूस करना बेहद जरूरी है — यह एक तरह की तीर्थ यात्रा है, जो आपको ययार्थ से रूबरू करवाती है। यह पुस्तक उस जटिल यात्रा को समझने का कंपास भी है। — राज कमल झा (मुख्य सम्पादक — द इंडियन एक्सप्रेस) **** ‘जेपी से बीजेपी : सौ साल के आईने’ में बिहार पुस्तक में बिहार की राजनीति का सिंहावलोकन भी है और 1952 चुनाव से लेकर 2025 के चुनाव का आकलन भी है। इस कहानी में बिहार की राजनीति के धुरंधर, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद तो हैं ही, भविष्य की राजनीति के दावेदारों की भी चर्चा है। यह त्रिवेणी संघ से तेजस्वी तक की यात्रा है, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह से लेकर कन्हैया कुमार तक का विवरण है। समाजवादी पुरोधा रामनन्दन मिश्र, जगदेव प्रसाद, कर्पूरी ठाकुर, रामानन्द तिवारी और कपिलदेव सिंह से गुज़रते हुए कांग्रेस की पूरी यात्रा भी है, उसकी थकान की दास्तां भी है, राहुल गांधी के पार्टी पुनर्जागरण का प्रयास भी है। समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण तो किताब के केन्द्र में हैं। समाजवाद से राष्ट्रवाद की यात्रा में जितने पड़ाव हैं, यह किताब सभी पड़ावों से गुजरती हैं। कैसे रामविलास पासवान तीन बार मुख्यमन्त्री बनने से चूक गये, लालू प्रसाद ने कैसे सत्ता पायी, शरद यादव बिहार कैसे आये और चारा घोटाले की अनकही कहानी क्या है? चिराग पासवान, सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के पुत्र प्रशान्त कुमार की क्या कहानी है? चुनावी रणनीतिकार प्रशान्त किशोर के नेता बनने की कैसी यात्रा है और क्यों बीजेपी अभी भी समाजवाद के आखिरी स्तम्भ नीतीश कुमार को डिकोड नहीं कर पा रही है? – इन सब जटिल विमर्शो पर किताब में बात की गयी है।
About Author
संतोष सिंह : जन्म : भागलपुर, पैतृक गाँव : रामचुआ (बाँका) शिक्षा : एम. ए. (पत्रकारिता और जनसंचार), गोल्ड मेडलिस्ट, नालन्दा खुला विश्वविद्यालय, पटना; स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पत्रकारिता), एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज़्म, बेंगलुरु, स्नातक (अंग्रेज़ी प्रतिष्ठा), टीएनबी कॉलेज, भागलपुर। किताबें : कामदेव सिंह द ओरिजिनल गॉडफादर ऑफ़ इंडियन पॉलिटिक्स (2022), जेपी टू बीजेपी : बिहार आफ्टर लालू एंड नीतीश (2021), रूल्ड और मिसरूल्ड : द स्टोरी एंड डेस्टिनी ऑफ़ बिहार (2015), (हिन्दी अनुवाद-कितना राज कितना काज), द जननायक कर्पूरी ठाकुर (हिन्दी अनुवाद-कर्पूरी ठाकुर,बेजुबानों की आवाज़)। सम्मान : 'इंडियन एक्सप्रेस अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन इनवेस्टीगेटिव जर्नलिज़्म', 2023 और 2021, 'रेड इंक अवॉर्ड', 2019 और 2018, 'प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया अवॉर्ड फॉर डेवलपमेंट जर्नलिज़्म', 2013, 'एक्सप्रेस एक्सीलेंस अवॉर्ड', 2012, 'द स्टेट्समैन रूरल रिपोर्टिंग अवॉर्ड', 2010, 'के सी कुलिश अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन प्रिंट जर्नलिज़्म', 2009।
शुभम कुमार : बिहार के पूर्वी चम्पारण से ताल्लुक रखने वाले शुभम को लिखना बेहद पसन्द है। इन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू.) से साहित्य में स्नातक किया। सोशल वर्क से एम.ए. किया, और उसके बाद ओडिशा के आदिवासी इलाक़ों में आदिवासियों के साहित्य और समाज पर दो वर्षों तक शोध किया है। शुभम पिछले चार सालों से लगातार देश के मीडिया संस्थानों के लिए लेखन का कार्य कर रहे हैं। इन्होंने हिन्दवी (रेख्ता), न्यूजक्लिक, द वायर, AajTak रेडियो, अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क, दैनिक हिन्दुस्तान, जनसत्ता जैसे संस्थानों के लिए लगातार लिखा है। अनुवाद इनका सबसे पसन्दीदा काम है। शब्दों को बरतने में माहिर शुभम ने कई कविताओं और लेखों का अनुवाद किया है। फिलवक्त, शुभम Jist Media समूह का हिस्सा हैं।
शुभम कुमार : बिहार के पूर्वी चम्पारण से ताल्लुक रखने वाले शुभम को लिखना बेहद पसन्द है। इन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू.) से साहित्य में स्नातक किया। सोशल वर्क से एम.ए. किया, और उसके बाद ओडिशा के आदिवासी इलाक़ों में आदिवासियों के साहित्य और समाज पर दो वर्षों तक शोध किया है। शुभम पिछले चार सालों से लगातार देश के मीडिया संस्थानों के लिए लेखन का कार्य कर रहे हैं। इन्होंने हिन्दवी (रेख्ता), न्यूजक्लिक, द वायर, AajTak रेडियो, अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क, दैनिक हिन्दुस्तान, जनसत्ता जैसे संस्थानों के लिए लगातार लिखा है। अनुवाद इनका सबसे पसन्दीदा काम है। शब्दों को बरतने में माहिर शुभम ने कई कविताओं और लेखों का अनुवाद किया है। फिलवक्त, शुभम Jist Media समूह का हिस्सा हैं।
Reviews
There are no reviews yet.
Be the first to review “JP se BJP : Sau Saal Ke Aaine Mein Bihar” Cancel reply
[wt-related-products product_id="test001"]

Reviews
There are no reviews yet.