Kitne Chaurahe
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Paltu Babu Road
Paltu Babu Road Original price was: ₹199.Current price is: ₹198.

Juloos

Publisher:
RajKamal
| Author:
Phaniswar Nath Renu
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
RajKamal
Author:
Phaniswar Nath Renu
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹595.Current price is: ₹446.

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7-10 Days

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ISBN:
Page Extent:
144

फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ का सम्पूर्ण साहित्य राजनीति की मज़बूत बुनियाद पर स्थित है । उन्होंने सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका को कभी राजनीति से कमतर नहीं माना । ‘मैला आँचल’ और ‘परती परिकथा’ की भाँति ‘जुलूस’ उपन्यास पूर्णिया जिले में नए बस रहे एक गाँव नबीनगर और पुर्व-प्रतिष्ठित गोडियर गाँव के प्र सम्बन्धों और संघर्षों की कथा है । इस उपन्यास में ‘रेणु’ ने स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात होनेवाले दंगों के कारण पूर्वी बंगाल से विस्थापित होकर भारत आए लोगों के दुख-दर्द की गाथा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है । साथ ही उन्होंने यह भी दिखाना चाहा है कि स्वतंत्रता-प्राप्ति के चौदह-पन्द्रह साल बाद भी गाँव में कितना अन्धकार, अन्ध-विश्वास, गरीबी और भुखमरी आदि व्याप्त है और लोग अनेक जटिलताओं में फँसे हुए हैं । एक संघर्षधर्मी सामाजिक चेतना तथा सामन्ती मूल्यों एवं लोगों के प्रति प्रतिरोध की भावना ‘रेणु’ के लगभग सभी उपन्यासों में मिलती है । ऐसा इस उपन्यास में भी देखने को मिलेगा । साथ ही माटी और मानुष के लगाव की इस रागात्मक कथा में पाठक को पवित्रा जैसी अविस्मरणीय किरदार देखने को मिलेगी ।.

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Description

फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ का सम्पूर्ण साहित्य राजनीति की मज़बूत बुनियाद पर स्थित है । उन्होंने सामाजिक बदलाव में साहित्य की भूमिका को कभी राजनीति से कमतर नहीं माना । ‘मैला आँचल’ और ‘परती परिकथा’ की भाँति ‘जुलूस’ उपन्यास पूर्णिया जिले में नए बस रहे एक गाँव नबीनगर और पुर्व-प्रतिष्ठित गोडियर गाँव के प्र सम्बन्धों और संघर्षों की कथा है । इस उपन्यास में ‘रेणु’ ने स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात होनेवाले दंगों के कारण पूर्वी बंगाल से विस्थापित होकर भारत आए लोगों के दुख-दर्द की गाथा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है । साथ ही उन्होंने यह भी दिखाना चाहा है कि स्वतंत्रता-प्राप्ति के चौदह-पन्द्रह साल बाद भी गाँव में कितना अन्धकार, अन्ध-विश्वास, गरीबी और भुखमरी आदि व्याप्त है और लोग अनेक जटिलताओं में फँसे हुए हैं । एक संघर्षधर्मी सामाजिक चेतना तथा सामन्ती मूल्यों एवं लोगों के प्रति प्रतिरोध की भावना ‘रेणु’ के लगभग सभी उपन्यासों में मिलती है । ऐसा इस उपन्यास में भी देखने को मिलेगा । साथ ही माटी और मानुष के लगाव की इस रागात्मक कथा में पाठक को पवित्रा जैसी अविस्मरणीय किरदार देखने को मिलेगी ।.

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