Main Krishna Hoon Box Set (6 Volumes)
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मैं कृष्ण हूँ – कृष्ण की संपूर्ण आत्मकथा’ – 6 बुक का यह कंप्लीट सेट विश्व की ऐसी पहली किताब है जिसमें कृष्ण के संपूर्ण जीवन का क्रमबद्ध उल्लेख किया गया है। इसे बेस्टसेलर्स ‘मैं मन हूँ’ और ‘101 सदाबहार कहानियां’ के लेखक तथा स्पीरिच्युअल सायको-डाइनैमिक्स के पायनियर दीप त्रिवेदी ने लिखा है और इसीलिए उन्होंने आवश्यक स्थानों पर कृष्ण की सायकोलॉजी पर से परदा उठाया है और यह भी बताया है कि कृष्ण ने जो किया वो क्यों किया। आत्मकथा के रूप में लिखी गई ‘मैं कृष्ण हूँ’ को पढ़ लेने के बाद पाठकों को यह ज्ञात हो जाता है कि कैसे कृष्ण ने अपने कर्मों के बलपर जीवन के हर संघर्ष पर विजय पायी और उस ऊंचाई पर जा बैठे जैसाकि आज हम उन्हें जानते हैं।
‘मैं कृष्ण हूँ’ के पहले तीन भाग अंग्रेजी भाषा में भी उपलब्ध है तथा इसके पहले भाग को साल 2018 के Crossword Book Awards के ‘Best Popular Non-Fiction’ कैटेगरी के लिए नामांकित भी किया जा चुका है।
‘मैं कृष्ण हूँ’ की इस पूरी श्रृंखला को पढ़ लेने के बाद कृष्ण से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण सवालों के जवाब स्वत: मिल जाते हैं जैसे : कृष्ण और राधा का प्यार क्या था? कृष्ण ने कितने विवाह किये थे? कृष्ण ने द्वारका क्यों और कैसे बसायी थी? कृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान पांडवों का ही साथ क्यों दिया था? यह यादवस्थली क्या है? कृष्ण की इस संपूर्ण आत्मकथा को पढ़ते-पढ़ते पाठक कब जीवन की गहराइयों और मन की ऊंचाइयों के बीच गोते लगाना शुरू कर देगा, उसे पता ही नहीं चलेगा। ‘मैं कृष्ण हूँ’ अनेकों पौराणिक ग्रन्थों से रिसर्च करने के बाद लिखी गई है। उन ग्रन्थों में प्रमुख है :
1. महाभारत 2. ऐतरेय आरण्यक 3. निरुक्त 4. गर्ग संहिता 5. इंडिका 6. हरिवंश पुराण 7. विष्णु पुराण 8. पद्म पुराण 9. मार्कंडेय पुराण 10. भागवत पुराण
मैं कृष्ण हूँ की 6 भागों की यह कंप्लीट सेट गुजराती में भी उपलब्ध है।
मैं कृष्ण हूँ – कृष्ण की संपूर्ण आत्मकथा’ – 6 बुक का यह कंप्लीट सेट विश्व की ऐसी पहली किताब है जिसमें कृष्ण के संपूर्ण जीवन का क्रमबद्ध उल्लेख किया गया है। इसे बेस्टसेलर्स ‘मैं मन हूँ’ और ‘101 सदाबहार कहानियां’ के लेखक तथा स्पीरिच्युअल सायको-डाइनैमिक्स के पायनियर दीप त्रिवेदी ने लिखा है और इसीलिए उन्होंने आवश्यक स्थानों पर कृष्ण की सायकोलॉजी पर से परदा उठाया है और यह भी बताया है कि कृष्ण ने जो किया वो क्यों किया। आत्मकथा के रूप में लिखी गई ‘मैं कृष्ण हूँ’ को पढ़ लेने के बाद पाठकों को यह ज्ञात हो जाता है कि कैसे कृष्ण ने अपने कर्मों के बलपर जीवन के हर संघर्ष पर विजय पायी और उस ऊंचाई पर जा बैठे जैसाकि आज हम उन्हें जानते हैं।
‘मैं कृष्ण हूँ’ के पहले तीन भाग अंग्रेजी भाषा में भी उपलब्ध है तथा इसके पहले भाग को साल 2018 के Crossword Book Awards के ‘Best Popular Non-Fiction’ कैटेगरी के लिए नामांकित भी किया जा चुका है।
‘मैं कृष्ण हूँ’ की इस पूरी श्रृंखला को पढ़ लेने के बाद कृष्ण से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण सवालों के जवाब स्वत: मिल जाते हैं जैसे : कृष्ण और राधा का प्यार क्या था? कृष्ण ने कितने विवाह किये थे? कृष्ण ने द्वारका क्यों और कैसे बसायी थी? कृष्ण ने महाभारत युद्ध के दौरान पांडवों का ही साथ क्यों दिया था? यह यादवस्थली क्या है? कृष्ण की इस संपूर्ण आत्मकथा को पढ़ते-पढ़ते पाठक कब जीवन की गहराइयों और मन की ऊंचाइयों के बीच गोते लगाना शुरू कर देगा, उसे पता ही नहीं चलेगा। ‘मैं कृष्ण हूँ’ अनेकों पौराणिक ग्रन्थों से रिसर्च करने के बाद लिखी गई है। उन ग्रन्थों में प्रमुख है :
1. महाभारत 2. ऐतरेय आरण्यक 3. निरुक्त 4. गर्ग संहिता 5. इंडिका 6. हरिवंश पुराण 7. विष्णु पुराण 8. पद्म पुराण 9. मार्कंडेय पुराण 10. भागवत पुराण
मैं कृष्ण हूँ की 6 भागों की यह कंप्लीट सेट गुजराती में भी उपलब्ध है।
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