NISHAD SAMAJ KA VRIHAT ITIHAS
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‘निषाद जाति का वृहत् इतिहास’ भारतीय संस्कृति और इतिहास की उन प्राचीनतम परतों की पड़ताल है, जिन्हें आर्य संस्कृति के नीचे दबा दिया गया है। या यूँ कहें कि सांस्कृतीकरण की प्रक्रिया के दौरान हड़प लिया गया है । इसकी पुष्टि सुनीति कुमार चटर्जी, कुबेरनाथ राय, रांगेय राघव, आचार्य चतुरसेन सहित विदेशी मूल के अनेक ख्यातिनाम लेखकों/ इतिहासकारों के अलावा उन धर्म- ग्रन्थों से भी होती है, जिन्हें आज भारतीय संस्कृति का आधार माना जाता है।
‘निषाद जाति का वृहत् इतिहास’ भारतीय संस्कृति और इतिहास की उन प्राचीनतम परतों की पड़ताल है, जिन्हें आर्य संस्कृति के नीचे दबा दिया गया है। या यूँ कहें कि सांस्कृतीकरण की प्रक्रिया के दौरान हड़प लिया गया है । इसकी पुष्टि सुनीति कुमार चटर्जी, कुबेरनाथ राय, रांगेय राघव, आचार्य चतुरसेन सहित विदेशी मूल के अनेक ख्यातिनाम लेखकों/ इतिहासकारों के अलावा उन धर्म- ग्रन्थों से भी होती है, जिन्हें आज भारतीय संस्कृति का आधार माना जाता है।
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