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Ram Viraje Rangon Mein | Colored Book Madhubani Paintings on Ramayana Themes (Hindi Edition)

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Dr. Rooplekha Chauhan
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
Dr. Rooplekha Chauhan
Language:
Hindi
Format:
Hardback

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Book Type

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Publisher

Prabhat Prakashan

Genre

Swadesi

ISBN:
SKU 9789355629203 Categories ,
Categories: ,
Page Extent:
104

कला ईश्वर की पोती है और पुत्री’। कला सभी का वरण नहीं करती, और जिसे वरण करती है, उसे विलक्षण बना देती है, असाधारण बना देती है। ‘राम विराजे रंगों में’ की प्रणेता डॉ. (श्रीमती) रूपलेखा चौहान के हृदय की धड़कन मधुबनी चित्रकला है। इस कला को डॉ. चौहान ने बचपन से ही अपने कल्पनालोक में पुष्पित और पल्लवित किया है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पूरे समर्पण और साधना के साथ इस कला को फलित किया है।

‘राम विराजे रंगों में’ शीर्षक से प्रणीत यह पुस्तक श्रीरामचरितमानस के आख्यान के आधार पर श्रीराम के जीवन पर बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक विभिन्न प्रसंगों पर मधुबनी शैली में बने सजीव और प्रेरक चित्रों का सुसज्जित दस्तावेज है। यों तो प्रत्येक चित्र अपनी गाथा स्वयं कहता है. लेकिन चित्रों के साथ दिए गए वर्णन ने चित्रों को सार्थक, सरल और सर्वग्राही बना दिया है। मधुबनी चित्रकला की अनूठी शैली में बने अनेकानेक चित्र पुस्तक की गरिमा और महिमा को प्रतिपादित करते हैं तथा धर्म, समाज और आध्यात्मिकता की शिक्षा देते हैं।

श्रीराम भारत के जनमानस में स्थापित हैं। उनका जीवन भारतीयों को उच्चतम आदर्शों की प्रेरणा देता है। समस्त चित्र डॉ. चौहान के मधुबनी शैली चित्रकला के प्रति समर्पण और श्रीराम के प्रति अनुराग की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति हैं। श्रीराम निश्चित ही इस पुस्तक को कालजयी बनाएँगे।

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Description

कला ईश्वर की पोती है और पुत्री’। कला सभी का वरण नहीं करती, और जिसे वरण करती है, उसे विलक्षण बना देती है, असाधारण बना देती है। ‘राम विराजे रंगों में’ की प्रणेता डॉ. (श्रीमती) रूपलेखा चौहान के हृदय की धड़कन मधुबनी चित्रकला है। इस कला को डॉ. चौहान ने बचपन से ही अपने कल्पनालोक में पुष्पित और पल्लवित किया है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पूरे समर्पण और साधना के साथ इस कला को फलित किया है।

‘राम विराजे रंगों में’ शीर्षक से प्रणीत यह पुस्तक श्रीरामचरितमानस के आख्यान के आधार पर श्रीराम के जीवन पर बालकांड से लेकर उत्तरकांड तक विभिन्न प्रसंगों पर मधुबनी शैली में बने सजीव और प्रेरक चित्रों का सुसज्जित दस्तावेज है। यों तो प्रत्येक चित्र अपनी गाथा स्वयं कहता है. लेकिन चित्रों के साथ दिए गए वर्णन ने चित्रों को सार्थक, सरल और सर्वग्राही बना दिया है। मधुबनी चित्रकला की अनूठी शैली में बने अनेकानेक चित्र पुस्तक की गरिमा और महिमा को प्रतिपादित करते हैं तथा धर्म, समाज और आध्यात्मिकता की शिक्षा देते हैं।

श्रीराम भारत के जनमानस में स्थापित हैं। उनका जीवन भारतीयों को उच्चतम आदर्शों की प्रेरणा देता है। समस्त चित्र डॉ. चौहान के मधुबनी शैली चित्रकला के प्रति समर्पण और श्रीराम के प्रति अनुराग की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति हैं। श्रीराम निश्चित ही इस पुस्तक को कालजयी बनाएँगे।

About Author

डॉ. रूपलेखा चौहान भारत की प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने चिकित्सीय सेवा नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज, जबलपुर से आरंभ की, जहाँ वह प्रोफेसर तथा विभगाध्यक्ष रहीं और वहीं डीन के पद से सेवानिवृत्त हुईं। बचपन से ही चित्रकारी के प्रति उनकी रुचि रही है। डॉक्टर रहते हुए उन्होंने चित्रकारी के लिए समय निकाला और अपनी साधना से चित्रकला के दीप को प्रदीप्त रखा। स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में उन्हें इंदौर में डॉ. एस. के. मुखर्जी राष्ट्रीय अवार्ड तथा डॉ. बी.सी. रॉय राष्ट्रीय अवार्ड से पुरस्कृत किया गया। शासकीय सेवा से निवृत्ति ने उनके कला और कल्पनाओं को नव पंख और नव आकाश दिए। उन्होंने रामचरितमानस एवं अन्य धर्म-ग्रंथों का गहन अध्ययन कर अपने आप में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचय किया और मधुबनी कला शैली में रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों पर जीवंत और अनूठे चित्र बनाए। वर्तमान में डॉ. चौहान अपनी क्लीनिक में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएँ दे रही हैं तथा तूलिका और रंगों के साथ उनकी कला-साधना भी अनवरत जारी है।

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