Description
“हर इंसान दो लड़ाइयाँ लड़ रहा है—एक दुनिया से, और एक ख़ुद से।
बस इतना जान लो, तुम अकेले नहीं हो।”
यह किताब मोटिवेशन नहीं देती—यह आपको गले लगाती है।
टेंशन मत ले यार उन लोगों के लिए है
जो सफल दिखते हुए भी भीतर से थके हुए हैं।
जो सही रास्ते पर होने के बावजूद खोया हुआ महसूस करते हैं।
जो बार-बार खुद से पूछते हैं— मैं कौन हूँ? मैं क्यों हूँ?
दिव्य प्रकाश दुबे इस किताब में
न गुरु बनते हैं,
न कोई लाइफ़ हैक बताते हैं,
और न ही कोई रेडीमेड समाधान बेचते हैं।
वे अपने असमंजस, असफलताओं, अकेलेपन, करियर की भटकन और जीवन के कठिन सवालों को उसी ईमानदारी से रखते हैं,
जैसे कोई दोस्त देर रात 2 बजे चाय के साथ बात करता है—
बिना जज किए, बिना उपदेश दिए।
अगर आप इस समय जीवन के किसी मोड़ पर अटके हुए हैं—
अगर सवाल ज़्यादा हैं और जवाब कम—
तो यह किताब आपको जवाब नहीं देगी,
बस इतना याद दिलाएगी कि आप अकेले नहीं हैं।
यह किताब उन बातों की जगह बनती है
जो माँ-पिता अपने बेटे-बेटी से,
दोस्त अपने दोस्त से,
छोटा भाई-बहन अपने किसी अपने से
कहना चाहते हैं—पर कह नहीं पाते।
इसीलिए यह अपनों को देने के लिए एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा बन जाती है।
यह किताब आपको ‘परफेक्ट’ बनने का दबाव नहीं देती।
यह बस आपके कंधे पर हाथ रखकर कहती है—
टेंशन मत ले यार।





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