गणेशपुराणम् (संस्कृत एवम् हिन्दी अनुवाद) - The Complete Ganesha Purana (Set of 2 Volumes)
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गणेशपुराण अठारह महापुराणों में से एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जो विशेष रूप से श्रीगणेश की महिमा, स्वरूप, चरित्र और उपासना-विधियों का विस्तार से वर्णन करता है। यह ग्रंथ वेद-पुराण परंपरा में अद्वितीय स्थान रखता है और इसे गणपति के उपासकों का मुख्य आधार माना जाता है।
विषयवस्तु और संरचना
इसमें श्रीगणेश के जन्म, अवतारों, लीलाओं, व्रतों, तीर्थों तथा स्तोत्रों का अद्भुत संकलन है।
इसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चार पुरुषार्थों की प्राप्ति हेतु गणेशोपासना की महिमा का वर्णन है।
इस पुराण में गणपति को ब्रह्मस्वरूप और सृष्टि का आदिकारण माना गया है।
साथ ही इसमें गणेश जी की भक्ति से मिलने वाले सांसारिक सुख और आध्यात्मिक कल्याण का भी विस्तृत उल्लेख है।
इस संस्करण की विशेषता
यह ग्रंथ संस्कृत श्लोकों के साथ सरल एवं प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद में प्रस्तुत है।
आचार्य डॉ. महेशानन्द जोशी ने इसमें न केवल भावानुवाद किया है, बल्कि सांस्कृतिक और दार्शनिक व्याख्या भी दी है।
भाषा सहज और स्पष्ट है, जिससे सामान्य पाठक भी इस ग्रंथ की गहराई को समझ सकता है।
महत्त्व
गणेशपुराण का पठन-मनन गणपति उपासकों, अध्यात्म-जिज्ञासुओं, शोधकर्ताओं और भारतीय संस्कृति के अध्येताओं सभी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
यह केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आस्था और जीवन-दर्शन का सजीव प्रतिबिंब है।
गणेशपुराण अठारह महापुराणों में से एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जो विशेष रूप से श्रीगणेश की महिमा, स्वरूप, चरित्र और उपासना-विधियों का विस्तार से वर्णन करता है। यह ग्रंथ वेद-पुराण परंपरा में अद्वितीय स्थान रखता है और इसे गणपति के उपासकों का मुख्य आधार माना जाता है।
विषयवस्तु और संरचना
इसमें श्रीगणेश के जन्म, अवतारों, लीलाओं, व्रतों, तीर्थों तथा स्तोत्रों का अद्भुत संकलन है।
इसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चार पुरुषार्थों की प्राप्ति हेतु गणेशोपासना की महिमा का वर्णन है।
इस पुराण में गणपति को ब्रह्मस्वरूप और सृष्टि का आदिकारण माना गया है।
साथ ही इसमें गणेश जी की भक्ति से मिलने वाले सांसारिक सुख और आध्यात्मिक कल्याण का भी विस्तृत उल्लेख है।
इस संस्करण की विशेषता
यह ग्रंथ संस्कृत श्लोकों के साथ सरल एवं प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद में प्रस्तुत है।
आचार्य डॉ. महेशानन्द जोशी ने इसमें न केवल भावानुवाद किया है, बल्कि सांस्कृतिक और दार्शनिक व्याख्या भी दी है।
भाषा सहज और स्पष्ट है, जिससे सामान्य पाठक भी इस ग्रंथ की गहराई को समझ सकता है।
महत्त्व
गणेशपुराण का पठन-मनन गणपति उपासकों, अध्यात्म-जिज्ञासुओं, शोधकर्ताओं और भारतीय संस्कृति के अध्येताओं सभी के लिए अत्यंत उपयोगी है।
यह केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आस्था और जीवन-दर्शन का सजीव प्रतिबिंब है।
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