Tumhari Jay
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सृष्टिकर्ता की तरह साहित्यकार भी अपने अपने ढंग से अपने देश, उसकी संस्कृति, परंपरा और इतिहास को व्याख्यायित करता है, नई स्थापनाएँ देता है। जैसे गंगा में कई नदियों का पानी, अनेक पर्वतों की मिट्टी और औषधीय तत्त्व मिलकर उसे उर्वरता प्रदान करते हैं, उसी प्रकार साहित्य को भी अनेक विधाएँ समृद्ध करती हैं। आशुतोष शुक्ल प्रयोगधर्मी लेखक हैं, जिन्होंने एक नई ‘संभाषी’ विधा से साहित्य को समृद्ध किया है। उनके शब्द लगातार पाठकों से बतियाते रहते हैं। सहजै सहज समाना की तरह वह अपनी शैली में सिद्धहस्त हैं। कम शब्दों में कही गई उनकी बात पानी की बूँद की तरह फैलती जाती है और फैलकर पूरी नदी बन जाती है। छोटे-छोटे वाक्यों में गुरुत्वाकर्षण सा बल है। उनकी संभाषी विधा साहित्य में नया गवाक्ष खोलती है जहाँ से ‘तुम्हारी जय’ का आख्यान साफ-साफ देखा जा सकता है। ‘तुम्हारी जय’ उन छोटी-छोटी बातों की बात करती है जो सदियों से भारतवासियों को गढ़ रही हैं। ‘तुम्हारी जय’ अनुपम और संग्रहणीय कृति है और भारत के इतिहास और समाज को देखने का नया दर्पण भी|
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सृष्टिकर्ता की तरह साहित्यकार भी अपने अपने ढंग से अपने देश, उसकी संस्कृति, परंपरा और इतिहास को व्याख्यायित करता है, नई स्थापनाएँ देता है। जैसे गंगा में कई नदियों का पानी, अनेक पर्वतों की मिट्टी और औषधीय तत्त्व मिलकर उसे उर्वरता प्रदान करते हैं, उसी प्रकार साहित्य को भी अनेक विधाएँ समृद्ध करती हैं। आशुतोष शुक्ल प्रयोगधर्मी लेखक हैं, जिन्होंने एक नई ‘संभाषी’ विधा से साहित्य को समृद्ध किया है। उनके शब्द लगातार पाठकों से बतियाते रहते हैं। सहजै सहज समाना की तरह वह अपनी शैली में सिद्धहस्त हैं। कम शब्दों में कही गई उनकी बात पानी की बूँद की तरह फैलती जाती है और फैलकर पूरी नदी बन जाती है। छोटे-छोटे वाक्यों में गुरुत्वाकर्षण सा बल है। उनकी संभाषी विधा साहित्य में नया गवाक्ष खोलती है जहाँ से ‘तुम्हारी जय’ का आख्यान साफ-साफ देखा जा सकता है। ‘तुम्हारी जय’ उन छोटी-छोटी बातों की बात करती है जो सदियों से भारतवासियों को गढ़ रही हैं। ‘तुम्हारी जय’ अनुपम और संग्रहणीय कृति है और भारत के इतिहास और समाज को देखने का नया दर्पण भी|
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Alok Verma –
🌸🙏🌸 तुम्हारी जय, आशुतोष भाई की जय, आपकी पुस्तक पढ़ी, क्या ग़ज़ब की किताब लिखी है भाई आपने, दिल खुश हो गया, जिस खूबसूरती से और गहनता से आपने भारतीय संस्कृति, परम्पराओं, भाषाओं और सनातन का विश्लेषण किया है अद्वितीय है, बहुत कुछ जानने को मिला, बहुत-बहुत धन्यवाद आशुतोष भाई, हम सभी को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए, यह आज के समय की जरूरत है, कहीं न कहीं सनातन परंपराओं के पराभव के लिए सम्भवतः हम सब जिम्मेदार हैँ, आपकी अदभुद लेखनी पर हम सभी को गर्व है, आपकी जय हो आशुतोष भाई, तुम्हारी जय, जय हो 🌸🙏🌸

Alok Verma –
🌸🙏🌸 तुम्हारी जय, आशुतोष भाई की जय, आपकी पुस्तक पढ़ी, क्या ग़ज़ब की किताब लिखी है भाई आपने, दिल खुश हो गया, जिस खूबसूरती से और गहनता से आपने भारतीय संस्कृति, परम्पराओं, भाषाओं और सनातन का विश्लेषण किया है अद्वितीय है, बहुत कुछ जानने को मिला, बहुत-बहुत धन्यवाद आशुतोष भाई, हम सभी को यह पुस्तक जरूर पढ़नी चाहिए, यह आज के समय की जरूरत है, कहीं न कहीं सनातन परंपराओं के पराभव के लिए सम्भवतः हम सब जिम्मेदार हैँ, आपकी अदभुद लेखनी पर हम सभी को गर्व है, आपकी जय हो आशुतोष भाई, तुम्हारी जय, जय हो 🌸🙏🌸