Description
वाइफ़ स्वॉपिंग वरिष्ठ खोजी पत्रकार विनीता यादव की एक साहसिक, झकझोर देने वाली और आँखें खोल देने वाली रिपोर्ताज पुस्तक है। यह किताब उस समाज की परतें उघाड़ती है, जिसे हम सभ्य, संस्कारी और सुरक्षित मानकर चलते हैं, लेकिन जिसके भीतर स्त्री देह के बाज़ारीकरण और विवाह संस्था के भीतर छिपी क्रूर सच्चाइयाँ साँस ले रही हैं। यह कोई काल्पनिक उपन्यास नहीं, बल्कि ज़मीनी हक़ीक़तों पर आधारित दस्तावेज़ है—उन महिलाओं की कहानियाँ, जो पति के कहने पर, समाज के डर से और परिवार की ‘इज़्ज़त’ के नाम पर अपने अस्तित्व का सौदा करने को मजबूर हैं। विनीता यादव अपने 23 वर्षों के खोजी पत्रकारिता अनुभव के साथ उन गलियों, घरों और कमरों तक पहुँचती हैं, जहाँ यह सब ‘नॉर्मल’ बना दिया गया है। किताब न सिर्फ़ ‘वाइफ़ स्वॉपिंग’ की प्रक्रिया और मानसिकता को सामने लाती है, बल्कि इसके सामाजिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों का गहन विश्लेषण भी करती है। यह पुस्तक पाठक को असहज करती है, सवाल पूछने पर मजबूर करती है और स्त्री, विवाह और नैतिकता को नये सिरे से समझने की चुनौती देती है। ‘वाइफ़ स्वॉपिंग’—एक ऐसा सच, जिसे देखना मुश्किल है, लेकिन नज़रअन्दाज़ करना अपराध।





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