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Ye Jeevan Hai

Publisher:
Jnanpith Vani Prakashan LLP
| Author:
आशापूर्णा देवी अनुवाद गीतालि भट्टाचार्य
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Jnanpith Vani Prakashan LLP
Author:
आशापूर्णा देवी अनुवाद गीतालि भट्टाचार्य
Language:
Hindi
Format:
Paperback

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SKU 9788126317028 Category
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Page Extent:
192

ये जीवन है –
ज्ञानपीठ पुरस्कार (1976) से सम्मानित बांग्ला लेखिका आशापूर्णा देवी ने प्रस्तुत संकलन ‘ये जीवन है’ में जिन कहानियों का चयन किया है, वे सब-की-सब निराली हैं। उनके चरित्रों में अन्तर्द्वन्द्व है, मानव की क्षुद्र और बृहत सत्ता की लोलुपता से संघर्ष है। समाज की खोखली रीतियों का पर्दाफ़ाश है और आधुनिक युग की नारी-स्वाधीनता को लेकर उभर रहे नारी-पुरुष के द्वन्द्व पर सजग दृष्टिपात।

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Description

ये जीवन है –
ज्ञानपीठ पुरस्कार (1976) से सम्मानित बांग्ला लेखिका आशापूर्णा देवी ने प्रस्तुत संकलन ‘ये जीवन है’ में जिन कहानियों का चयन किया है, वे सब-की-सब निराली हैं। उनके चरित्रों में अन्तर्द्वन्द्व है, मानव की क्षुद्र और बृहत सत्ता की लोलुपता से संघर्ष है। समाज की खोखली रीतियों का पर्दाफ़ाश है और आधुनिक युग की नारी-स्वाधीनता को लेकर उभर रहे नारी-पुरुष के द्वन्द्व पर सजग दृष्टिपात।

About Author

आशापूर्णा देवी कोलकाता में 8 जनवरी, 1909 को जनमी बांग्ला की अग्रणी साहित्यकार श्रीमती आशापूर्णा देवी ने किशोरावस्था से ही लेखन प्रारम्भ कर दिया था। बांग्ला साहित्य की समृद्धि में उनका योगदान अद्वितीय है। उनके लगभग 140 उपन्यास, 24 कथा-संकलन एवं 25 बाल - पुस्तिकाएँ प्रकाशित हैं। भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित उनकी रचनाएँ हैं-'सुवर्णलता', 'बकुलकथा', 'प्रारब्ध', 'लीला चिरन्तन', 'दृश्य से दृश्यान्तर' और 'न जाने कहाँ कहाँ' (उपन्यास); 'किर्चियाँ' एवं 'ये जीवन है' (कहानी-संग्रह ) । 13 जुलाई 1995 को कोलकाता में उनका निधन हुआ।

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