Bijuka Babu Original price was: ₹400.Current price is: ₹300.

Save: 25%

Back to products
Swami Vivekanand : Prasiddh Darshnik, Anjaan Kavi Original price was: ₹500.Current price is: ₹376.

Save: 25%

Ye Khabren Nahin Chhapatin

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Rekha Dwivedi
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
Rekha Dwivedi
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹350.Current price is: ₹263.

Save: 25%

Out of stock

Ships within:
7-10 Days

Out of stock

Book Type

Discount
Categories: ,
Page Extent:
192

एक इनसान को इस दुनिया में भोजन, वस्त्र, मन और एक साथी के बाद यदि किसी चीज की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है तो वे हैं कहानियाँ, क्योंकि हर समय हर व्यक्ति के मस्तिष्क में उसके अपने बारे में कोई-न-कोई कहानी चलती रहती है। यह कहानी ही उस व्यक्ति को वह बनाती है, जो वह है। अनंत काल से कहानियाँ मानव जीवन का अभिन्न अंग रही हैं। कहानियाँ विश्व के हर काल, देश, आयु के लोगों के लिए हमेशा से मनोरंजन का साधन तो रही ही हैं, साथ ही सरलतम तरीके से ज्ञान-विज्ञान, भाषा, इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र आदि विषयों की वाहिका भी। किसी भी व्यक्ति के लिए यह बहुत बड़ी व्यथा होती है कि उसके जीवन में कोई अनकही कहानी रह जाए।संभवतः ये कहानियाँ भी व्यथा से उपजी हैं, अतः सच्चाई के काफी करीब हैं। ये समाज में फैले सांप्रदायिक दुर्भाव के बीच उत्पन्न हुई संवेदना और सद्भाव की कहानियाँ हैं। भारतवर्ष जैसे देश में, जहाँ विभिन्न जातियों, धर्मों, भाषाओं के वे सब लोग बसते हैं, जो पूरी दुनिया में कहीं भी मौजूद हैं, उसके बावजूद यदि यह देश चल रहा है और आगे बढ़ रहा है तो निश्चित रूप से यहाँ सद्भाव है। वैसे तो इस पुस्तक की हर कहानी एकदम अलग है, परंतु फिर भी ये सब एक धागे से जुड़ी हैं। जैसे धागा सारे फूलों को जोडे़ रखता है, वैसे ही ये कहानियाँ सांप्रदायिक सद्भाव की भावना से जुड़ी हैं।.

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Ye Khabren Nahin Chhapatin”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Description

एक इनसान को इस दुनिया में भोजन, वस्त्र, मन और एक साथी के बाद यदि किसी चीज की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है तो वे हैं कहानियाँ, क्योंकि हर समय हर व्यक्ति के मस्तिष्क में उसके अपने बारे में कोई-न-कोई कहानी चलती रहती है। यह कहानी ही उस व्यक्ति को वह बनाती है, जो वह है। अनंत काल से कहानियाँ मानव जीवन का अभिन्न अंग रही हैं। कहानियाँ विश्व के हर काल, देश, आयु के लोगों के लिए हमेशा से मनोरंजन का साधन तो रही ही हैं, साथ ही सरलतम तरीके से ज्ञान-विज्ञान, भाषा, इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र आदि विषयों की वाहिका भी। किसी भी व्यक्ति के लिए यह बहुत बड़ी व्यथा होती है कि उसके जीवन में कोई अनकही कहानी रह जाए।संभवतः ये कहानियाँ भी व्यथा से उपजी हैं, अतः सच्चाई के काफी करीब हैं। ये समाज में फैले सांप्रदायिक दुर्भाव के बीच उत्पन्न हुई संवेदना और सद्भाव की कहानियाँ हैं। भारतवर्ष जैसे देश में, जहाँ विभिन्न जातियों, धर्मों, भाषाओं के वे सब लोग बसते हैं, जो पूरी दुनिया में कहीं भी मौजूद हैं, उसके बावजूद यदि यह देश चल रहा है और आगे बढ़ रहा है तो निश्चित रूप से यहाँ सद्भाव है। वैसे तो इस पुस्तक की हर कहानी एकदम अलग है, परंतु फिर भी ये सब एक धागे से जुड़ी हैं। जैसे धागा सारे फूलों को जोडे़ रखता है, वैसे ही ये कहानियाँ सांप्रदायिक सद्भाव की भावना से जुड़ी हैं।.

Shipping & Delivery

About Author

शोध कार्य : जैनेंद्र के साहित्य में नारी पात्र (प्रकाशित)। शिक्षण : हिंदी विभाग, राजीव गांधी यूनिवर्सिटी, ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश); निदेशक तथा संपादक, राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान। रेडियो एवं टेलीविजन कार्यक्रमों में सहभागिता। कृतित्व : सद्भाव से संबंधित 20 पुस्तकें संपादित। ‘हिरण्यगर्भा’ एवं ‘जागती आँखों के सपने’ शीर्षक कविता-संग्रह प्रकाशित। समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, लेख एवं कविताएँ प्रकाशित। शौक : देश-विदेश की यात्राएँ, पठन-पाठन, बागवानी और हमेशा नया सीखने की चाह।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Ye Khabren Nahin Chhapatin”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[wt-related-products product_id="test001"]

RELATED PRODUCTS

RECENTLY VIEWED