Jayshankar Prasad Set Of 4 Books : sampurn kahaniyan I sampurn naatak I sampurn upanyas I Sampurn Kavya
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जयशंकर प्रसाद की “संपूर्ण रचनाएँ” नामक यह चार पुस्तकों का सेट हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनमोल संग्रह है। इस सेट में उनकी संपूर्ण कहानियाँ, नाटक, उपन्यास और काव्य एक साथ संकलित हैं, जिससे पाठक उनके बहुआयामी लेखन से रूबरू हो सकते हैं। जयशंकर प्रसाद छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं और उनके साहित्य में गहरी भावनात्मकता, ऐतिहासिक दृष्टिकोण और काव्यात्मक भाषा का अद्वितीय मेल देखने को मिलता है।
पहली पुस्तक में उनकी संपूर्ण कहानियाँ संकलित हैं, जिनमें ‘ग्राम’, ‘आंधी’, ‘छोटा जादूगर’ जैसी कालजयी कहानियाँ शामिल हैं। दूसरी पुस्तक में उनके संपूर्ण नाटक संकलित हैं, जिनमें ‘स्कंदगुप्त’, ‘चंद्रगुप्त’, ‘ध्रुवस्वामिनी’ जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाटक हैं, जो राष्ट्रभक्ति और संस्कृति के गौरव को उद्घाटित करते हैं। तीसरी पुस्तक में उनके संपूर्ण उपन्यास जैसे ‘कंकाल’, ‘तितली’ और ‘इरावती’ शामिल हैं, जिनमें सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक विषयों की प्रस्तुति है।
चौथी और अंतिम पुस्तक में उनका संपूर्ण काव्य संग्रहीत है, जिसमें ‘कामायनी’, ‘आंसू’, ‘झरना’ जैसी प्रसिद्ध काव्य रचनाएँ सम्मिलित हैं। प्रसाद की कविताएँ दर्शन, अध्यात्म और मानव मन की गहराइयों में उतरने का अवसर देती हैं। यह चार पुस्तकों का संग्रह न केवल एक साहित्यिक खजाना है, बल्कि यह हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति की आत्मा को भी प्रतिबिंबित करता है। जो पाठक हिंदी साहित्य की गहराई में जाना चाहते हैं, उनके लिए यह सेट अत्यंत उपयोगी और संग्रहणीय है।
जयशंकर प्रसाद की “संपूर्ण रचनाएँ” नामक यह चार पुस्तकों का सेट हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनमोल संग्रह है। इस सेट में उनकी संपूर्ण कहानियाँ, नाटक, उपन्यास और काव्य एक साथ संकलित हैं, जिससे पाठक उनके बहुआयामी लेखन से रूबरू हो सकते हैं। जयशंकर प्रसाद छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं और उनके साहित्य में गहरी भावनात्मकता, ऐतिहासिक दृष्टिकोण और काव्यात्मक भाषा का अद्वितीय मेल देखने को मिलता है।
पहली पुस्तक में उनकी संपूर्ण कहानियाँ संकलित हैं, जिनमें ‘ग्राम’, ‘आंधी’, ‘छोटा जादूगर’ जैसी कालजयी कहानियाँ शामिल हैं। दूसरी पुस्तक में उनके संपूर्ण नाटक संकलित हैं, जिनमें ‘स्कंदगुप्त’, ‘चंद्रगुप्त’, ‘ध्रुवस्वामिनी’ जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाटक हैं, जो राष्ट्रभक्ति और संस्कृति के गौरव को उद्घाटित करते हैं। तीसरी पुस्तक में उनके संपूर्ण उपन्यास जैसे ‘कंकाल’, ‘तितली’ और ‘इरावती’ शामिल हैं, जिनमें सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक विषयों की प्रस्तुति है।
चौथी और अंतिम पुस्तक में उनका संपूर्ण काव्य संग्रहीत है, जिसमें ‘कामायनी’, ‘आंसू’, ‘झरना’ जैसी प्रसिद्ध काव्य रचनाएँ सम्मिलित हैं। प्रसाद की कविताएँ दर्शन, अध्यात्म और मानव मन की गहराइयों में उतरने का अवसर देती हैं। यह चार पुस्तकों का संग्रह न केवल एक साहित्यिक खजाना है, बल्कि यह हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति की आत्मा को भी प्रतिबिंबित करता है। जो पाठक हिंदी साहित्य की गहराई में जाना चाहते हैं, उनके लिए यह सेट अत्यंत उपयोगी और संग्रहणीय है।
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