हिंदी साहित्य का सुबोध इतिहास
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जंगल की कहानियाँ
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कुत्ते की कहानियाँ

Publisher:
Adwait Prakashan
| Author:
Munshi Premchand
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Adwait Prakashan
Author:
Munshi Premchand
Language:
Hindi
Format:
Hardback

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7-10 Days

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ISBN:
Category:
Page Extent:
71

मुंशी प्रेमचंद सिर्फ ‘कलम का मजदूर’ या ‘कलम के सिपाही’ ही नहीं थे, वे ‘कलम के जादूगर’ भी थे। वे अपने समय और समाज के जागरूक प्रहरी थे। उनकी कलम ने अपने समाज की लगभग हर तरह की समस्या पर उंगली रखी और ऐसा यथार्थ चित्रण किया कि आज भी वह उस समय के भारतीय ग्रामीण एवं बाहरी जीवन का प्रामाणिक दस्तावेज है। दुनिया भर की भाषाओं में उनके उपन्यासों, कहानियों के अनुवाद हुए हैं। उन्होंने 18 उपन्यास और लगभग तीन सौ कहानियाँ और सैकड़ों लेख लिखे। वे कलम से ही जीते थे। उन्होंने हंस पत्रिका की स्थापना की। वे प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक रहे। गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि और कफन, पूस की रात, सद्गति, पंच परमेश्वर, हीरा मोती, ठाकुर का कुआं आदि अनेक कथाकृतियां विश्व साहित्य में उच्च कोटि का स्थान रखती हैं। आज के समय में प्रेमचंद की कथाओं को पढ़ना एक बार फिर अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को खोजना है। प्रेमचंद साम्राज्यवादी-सामंतवादी जीवन स्थितियों और मूल्यों के विपक्ष में सेकूलर प्रगतिशीलता की मशाल जलाने वाले रचनाकार थे। उनकी रचनाएं आज भी हमें अतीत को बता, वर्तमान को सुलझा भविष्य का संकेत देती है। आज प्रेमचंद की कलम वक्त की जरूरत है। उनकी सरल, सुबोध, चुटीली, व्यंग्यात्मक, मार्मिक भाषा सीधे दिल में उतर जाती है। आप इन्हें खरीदें, पढ़ें, दूसरों को भी पढ़ाएं।

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Description

मुंशी प्रेमचंद सिर्फ ‘कलम का मजदूर’ या ‘कलम के सिपाही’ ही नहीं थे, वे ‘कलम के जादूगर’ भी थे। वे अपने समय और समाज के जागरूक प्रहरी थे। उनकी कलम ने अपने समाज की लगभग हर तरह की समस्या पर उंगली रखी और ऐसा यथार्थ चित्रण किया कि आज भी वह उस समय के भारतीय ग्रामीण एवं बाहरी जीवन का प्रामाणिक दस्तावेज है। दुनिया भर की भाषाओं में उनके उपन्यासों, कहानियों के अनुवाद हुए हैं। उन्होंने 18 उपन्यास और लगभग तीन सौ कहानियाँ और सैकड़ों लेख लिखे। वे कलम से ही जीते थे। उन्होंने हंस पत्रिका की स्थापना की। वे प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक रहे। गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि और कफन, पूस की रात, सद्गति, पंच परमेश्वर, हीरा मोती, ठाकुर का कुआं आदि अनेक कथाकृतियां विश्व साहित्य में उच्च कोटि का स्थान रखती हैं। आज के समय में प्रेमचंद की कथाओं को पढ़ना एक बार फिर अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को खोजना है। प्रेमचंद साम्राज्यवादी-सामंतवादी जीवन स्थितियों और मूल्यों के विपक्ष में सेकूलर प्रगतिशीलता की मशाल जलाने वाले रचनाकार थे। उनकी रचनाएं आज भी हमें अतीत को बता, वर्तमान को सुलझा भविष्य का संकेत देती है। आज प्रेमचंद की कलम वक्त की जरूरत है। उनकी सरल, सुबोध, चुटीली, व्यंग्यात्मक, मार्मिक भाषा सीधे दिल में उतर जाती है। आप इन्हें खरीदें, पढ़ें, दूसरों को भी पढ़ाएं।

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