Kama Sutra-.amorous Man & Sensuous Woman
Kama Sutra-.amorous Man & Sensuous Woman Original price was: ₹695.Current price is: ₹521.
Back to products
Swann's Way: In Search of Lost Time, Volume 1
Swann's Way: In Search of Lost Time, Volume 1 Original price was: ₹1,599.Current price is: ₹1,359.

Srila Prabhupada Ki Gauravgatha

Publisher:
Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
| Author:
Hindol Sengupta
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
Author:
Hindol Sengupta
Language:
Hindi
Format:
Paperback

Original price was: ₹600.Current price is: ₹480.

In stock

Ships within:
7-10 Days

In stock

ISBN:
Categories: ,
Page Extent:
272

17 सितंबर, 1965 को जब अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद ने न्यूयॉर्क सिटी के बंदरगाह में प्रवेश किया तो इस ओर अमेरिका के कुछ ही लोगों का ध्यान गया, लेकिन वह कोई सामान्य आप्रवासी नहीं थे। वह अमेरिका के जनसामान्य का परिचय वैदिक भारत की शिक्षा से कराने के अभियान पर निकले थे।इक्यासी वर्ष की आयु में 14 नवंबर, 1977 को अपने निधन से पूर्व प्रभुपाद का अभियान सफल हो चुका था। वह इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) की स्थापना कर चुके थे, जिसे आम बोलचाल में ‘हरे कृष्ण आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है। उनके जीवनकाल में ही यह 100 से अधिक मंदिरों, आश्रमों और सांस्कृतिक केंद्रों के एक विश्वव्यापी महासंघ का रूप ले चुका था। इस्कॉन के संस्थापक के रूप में वह पश्चिमी प्रतिसंस्कृति के एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में सामने आए, जिन्होंने हजारों अमेरिकी युवाओं को दीक्षा दी। श्रील प्रभुपाद अपने करिश्माई नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनके अनुयायी अमेरिका, यूरोप और भारत समेत कई देशों में हैं। उनकी जीवन-कहानी से प्रेरित होकर आप निश्चित रूप से आत्मानुभूति के पथ पर अग्रसर होंगे। विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक विभूति पूज्य प्रभुपाद स्वामीजी के त्याग, समर्पण और मानवकल्याण को समर्पित प्रेरक जीवनगाथा है यह पुस्तक।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Srila Prabhupada Ki Gauravgatha”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Description

17 सितंबर, 1965 को जब अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद ने न्यूयॉर्क सिटी के बंदरगाह में प्रवेश किया तो इस ओर अमेरिका के कुछ ही लोगों का ध्यान गया, लेकिन वह कोई सामान्य आप्रवासी नहीं थे। वह अमेरिका के जनसामान्य का परिचय वैदिक भारत की शिक्षा से कराने के अभियान पर निकले थे।इक्यासी वर्ष की आयु में 14 नवंबर, 1977 को अपने निधन से पूर्व प्रभुपाद का अभियान सफल हो चुका था। वह इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) की स्थापना कर चुके थे, जिसे आम बोलचाल में ‘हरे कृष्ण आंदोलन’ के नाम से जाना जाता है। उनके जीवनकाल में ही यह 100 से अधिक मंदिरों, आश्रमों और सांस्कृतिक केंद्रों के एक विश्वव्यापी महासंघ का रूप ले चुका था। इस्कॉन के संस्थापक के रूप में वह पश्चिमी प्रतिसंस्कृति के एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में सामने आए, जिन्होंने हजारों अमेरिकी युवाओं को दीक्षा दी। श्रील प्रभुपाद अपने करिश्माई नेतृत्व के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनके अनुयायी अमेरिका, यूरोप और भारत समेत कई देशों में हैं। उनकी जीवन-कहानी से प्रेरित होकर आप निश्चित रूप से आत्मानुभूति के पथ पर अग्रसर होंगे। विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक विभूति पूज्य प्रभुपाद स्वामीजी के त्याग, समर्पण और मानवकल्याण को समर्पित प्रेरक जीवनगाथा है यह पुस्तक।

About Author

हिंडोल सेनगुप्ता पुरस्कृत लेखक हैं, जिन्होंने नौ पुस्तकें लिखी हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वॉर्सेस्टर कॉलेज से उन्होंने चेवेनिंग स्कॉलर के रूप में दक्षिण एशियाई इतिहास और अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने नाइटबेजहॉट फेलो के रूप में कोलंबिया यूनिवर्सिटी से व्यापार और वित्त की शिक्षा भी प्राप्त की। जिनेवा स्कूल ऑफ डिप्लोमेसी ऐंड इंटरनेशनल रिलेशंस से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। विश्व आर्थिक मंच ने सेनगुप्ता को अपने युवा वैश्विक नेताओं में शामिल किया था।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Srila Prabhupada Ki Gauravgatha”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[wt-related-products product_id="test001"]

RELATED PRODUCTS

RECENTLY VIEWED